hi
0
Search
Shayari
Writers
Events
Blog
Store
Help
Login
By:
00:00/00:00
Shams Amiruddin
sarsari sii ye baat jaa-guzin hai
sarsari sii ye baat jaa-guzin hai | सरसरी सी ये बात जा-गुज़ीं है
- Shams Amiruddin
सरसरी
सी
ये
बात
जा-गुज़ीं
है
के
हया
उन
में
थोड़ी
भी
नहीं
है
लोग
वो
ख़ाक
होंगे
ग़ैरतमंद
जो
वफ़ादार
इक
ज़रा
नहीं
है
- Shams Amiruddin
Download Sher Image
ये
हक़ीक़त
है,
मज़हका
नहीं
है
वो
बहुत
दूर
है,
जुदा
नहीं
है
तेरे
होंटों
पे
रक़्स
करता
है
राज़
जो
अब
तलक
खुला
नहीं
है
जान
ए
जांँ
तेरे
हुस्न
के
आगे
ये
जो
शीशा
है,
आइना
नहीं
है
क्यूँ
शराबोर
हो
पसीने
में
मैं
ने
बोसा
अभी
लिया
नहीं
है
उस
का
पिंदार
भी
वहीं
का
वहीं
मेरे
लब
पर
भी
इल्तेजा
नहीं
है
जो
भी
होना
था
हो
चुका
काज़िम
अब
किसी
से
हमें
गिला
नहीं
है
Read Full
Kazim Rizvi
Send
Download Image
5 Likes
मुँह
फेर
कर
वो
कहते
हैं
बस
मान
जाइए
इस
शर्म
इस
लिहाज़
के
क़ुर्बान
जाइए
Bekhud Dehelvi
Send
Download Image
17 Likes
मुझ
को
ये
आरज़ू
वो
उठाएँ
नक़ाब
ख़ुद
उन
को
ये
इंतिज़ार
तक़ाज़ा
करे
कोई
Asrar Ul Haq Majaz
Send
Download Image
33 Likes
किसी
के
झूठ
से
पर्दा
हटाकर
हमारा
सच
बहुत
रोया
था
उस
दिन
Shadab Asghar
Send
Download Image
5 Likes
हम
तो
उस
आँख
के
हैं
देखने
वाले,
देखो
जिस
में
शोख़ी
है
बहुत
और
हया
थोड़ी
सी
Read Full
Dagh Dehlvi
Send
Download Image
28 Likes
सब
ने
माना
मरने
वाला
दहशत-गर्द
और
क़ातिल
था
माँ
ने
फिर
भी
क़ब्र
पे
उस
की
राज-दुलारा
लिक्खा
था
Ahmad Salman
Send
Download Image
38 Likes
वो
एक
राज़
जो
मुद्दत
से
राज़
था
ही
नहीं
उस
एक
राज़
से
पर्दा
उठा
दिया
गया
है
Aziz Nabeel
Send
Download Image
19 Likes
अब
मज़ीद
उस
सेे
ये
रिश्ता
नहीं
रक्खा
जाता
जिस
सेे
इक
शख़्स
का
पर्दा
नहीं
रक्खा
जाता
पढ़ने
जाता
हूँ
तो
तस्में
नहीं
बाँधे
जाते
घर
पलटता
हूँ
तो
बस्ता
नहीं
रक्खा
जाता
Read Full
Tehzeeb Hafi
Send
Download Image
128 Likes
सोचकर
अब
शर्म
आती
है
ज़रा
चूम
लेना
होंठ
को
इज़हार
में
Neeraj Neer
Send
Download Image
28 Likes
दीवारें
छोटी
होती
थीं
लेकिन
पर्दा
होता
था
तालों
की
ईजाद
से
पहले
सिर्फ़
भरोसा
होता
था
Azhar Faragh
Send
Download Image
52 Likes
Read More
ज़िंदगी
ये
थी
जिसके
लिए
तुम
ही
तुम
थी
वो
मेरे
लिए
क्या
ज़माना
था
वो
तुम
भी
जब
माँगे
थे
ख़ुद
को
मेरे
लिए
मुद्दतों
से
कई
मैंने
भी
जो
किया
कुछ
न
तेरे
लिए
इक
दु'आ
माँगी
है
इसलिए
ख़ुश
रहो
तुम
सदा
के
लिए
माँग
लो
तुम
ख़ुदास
कभी
अब
दु'आ
एक
ख़ुद
के
लिए
हो
भी
पूरी
ये
ख़्वाहिश
तिरी
जो
मैं
मर
जाऊँ
तेरे
लिए
Read Full
Shams Amiruddin
Download Image
0 Likes
आँखों
में
उनकी
मैंने
देखा
है
ज़ेहन
में
उनके
कोई
और
बसा
है
नाराज़गी
है
भी
तो
जताएँ
कैसे
उस
ने
अपना
बना
के
जो
छोड़ा
है
Read Full
Shams Amiruddin
Send
Download Image
0 Likes
एक
घर
है
एक
ही
आँगन
मेरा
छोड़
आया
मैं
जहाँ
बचपन
मेरा
गाँव
से
निकला
कमाने
को
मैं
जब
खो
गया
परदेश
में
यौवन
मेरा
याद
है
वो
फूल
और
वो
तितलियाँ
मोह
ली
थी
पल
में
ही
जो
मन
मेरा
है
तमन्ना
खुल
के
झूमूँ
मैं
मगर
कट
रहा
है
तेरे
बिन
सावन
मेरा
सोचता
हूँ
इस
बरस
पहना
दूँ
मैं
ख़ानदानी
तुझ
को
इक
कंगन
मेरा
Read Full
Shams Amiruddin
Download Image
0 Likes
मैं
एक
रोज़
ख़ुद
को
ऐसा
बनाऊँगा
ओ
खोने
वाले
तुझ
को
फिर
याद
आऊँगा
आती
है
इस
क़दर
मुझ
को
याद
गाँव
की
तुम
देखना
किसी
दिन
मैं
लौट
आऊँगा
Read Full
Shams Amiruddin
Send
Download Image
0 Likes
खेल
सारा
ही
फ़क़त
क़िस्मत
का
है
जाँ
ख़त्म
होती
है
यहाँ
सारी
दास्ताँ
इश्क़
में
मिलना
मुक़द्दर
है
वर्ना
तो
मिट
गए
हैं
इश्क़
के
कितने
ही
निशाँ
Read Full
Shams Amiruddin
Send
Download Image
0 Likes
Read More
Akbar Allahabadi
Krishna Bihari Noor
Shariq Kaifi
Mohammad Alvi
Anjum Rehbar
Abhishar Geeta Shukla
Ali Zaryoun
Zehra Nigaah
Amjad Islam Amjad
Asad Bhopali
Get Shayari on your Whatsapp
haseen Shayari
Narazgi Shayari
Chaaragar Shayari
Bijli Shayari
Intiqam Shayari