प्रेम-सागरमेंजबइकलहरपुरानीआई
ख़्वाहिश-ए-दिलकेसफ़ीनेमेंरवानीआई
हमनेकाटाहैघनीरातसागुज़राहरदिन
चारदिनमेंनहींयेभोरसुहानीआई
अव्वलनरोज़निहारीथीसुख़नकीसूरत
तबकहींहर्फ़सेतस्वीरबनानीआई
ख़ूबकोशिशकिकहानीकोबड़ाकरनेकी
आख़िरशख़त्महीहोनेपेकहानीआई
एकमौसमकेमुताबिकजोढलेहीथेहम
दूसरीओरनईरुतकीनिशानीआई