na hi mehfil na raushan ghar ata kar | न ही महफ़िल न रौशन घर अता कर

  - Dipanshu Shams
हीमहफ़िलरौशनघरअताकर
परिन्दाहूँमुझेअंबरअताकर
ग़मोंकीफ़ौजसेलड़नेकोमौला
मुझेहिम्मतकाइकलश्करअताकर
धुआँहैआगहैहरसूख़ुदाया
यहाँकोईतोख़ुश-मंज़रअताकर
रखीहैचाकपरमिट्टीहमारी
उसेवक़्तकूज़ा-गरअताकर
मोहब्बतहैमुझेजिससेेउसेरब
तसव्वुरसेकभीबाहरअताकर
  - Dipanshu Shams
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