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Shajar Abbas
tum ko ehsaas nahin hai meri barbaa
tum ko ehsaas nahin hai meri barbaa | तुम को एहसास नहीं है मेरी बर्बादी का
- Shajar Abbas
तुम
को
एहसास
नहीं
है
मेरी
बर्बादी
का
तुम
को
एहसास
अगर
होता
तो
तुम
मर
जाते
- Shajar Abbas
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समझ
के
आग
लगाना
हमारे
घर
में
तुम
हमारे
घर
के
बराबर
तुम्हारा
भी
घर
है
Hafeez Banarasi
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लोग
औरत
को
फ़क़त
जिस्म
समझ
लेते
हैं
रुह
भी
होती
है
उस
में
ये
कहाँ
सोचते
हैं
Sahir Ludhianvi
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मुझको
फिर
से
हसीन
लगने
लगी
उसने
इस
तरह
पेश
की
दुनिया
मुझको
अपनी
समझ
नहीं
आती
और
ऊपर
से
ये
तेरी
दुनिया
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Tajdeed Qaiser
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वो
मुझको
जिस
तरह
से
दुआएँ
था
दे
रहा
मैं
तो
समझ
गया
ये
क़यामत
की
रात
हैं
AMAN RAJ SINHA
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वो
ना-समझ
मुझे
पत्थर
समझ
के
छोड़
गया
वो
चाहता
तो
सितारे
तराशता
मुझ
से
Shahid Zaki
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घर
की
तक़सीम
में
अँगनाई
गँवा
बैठे
हैं
फूल
गुलशन
से
शनासाई
गँवा
बैठे
हैं
बात
आँखों
से
समझ
लेने
का
दावा
मत
कर
हम
इसी
शौक़
में
बीनाई
गँवा
बैठे
हैं
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Abrar Kashif
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रफ़्ता
रफ़्ता
सब
कुछ
समझ
गया
हूँ
मैं
लोग
अचानक
टैरेस
से
क्यूँ
कूद
गए
Shadab Asghar
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लम्स
उसका
इस
क़दर
महसूस
होता
है
मुझे
हो
कोई
नाराज़
तितली
फूल
पर
बैठी
हुई
फ़िल्म
में
शायद
बिछड़ने
का
कोई
अब
सीन
है
और
मेरे
हाथ
को
वो
थाम
कर
बैठी
हुई
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Sunny Seher
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अपनी
हालत
का
ख़ुद
एहसास
नहीं
है
मुझ
को
मैं
ने
औरों
से
सुना
है
कि
परेशान
हूँ
मैं
Aasi Uldani
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उसे
महसूस
भी
होने
न
दूँगा
कि
उसके
प्यार
में
मैं
मर
चुका
हूँ
Umesh Maurya
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दिल-ए-नादाँ
हिमाक़त
कर
रहा
है
ये
फिर
तुझ
सेे
मोहब्बत
कर
रहा
है
मेरा
ये
हाल
है
ग़म
में
तुम्हारे
जो
देखे
है
वो
हैरत
कर
रहा
है
मुनाफिक़
मल
रहे
हैं
हाथ
अपने
कोई
बन्दा
इबादत
कर
रहा
है
चराग़-ए-हक़
न
गुल
होगा
सितम
से
ख़ुदा
इसकी
हिफाज़त
कर
रहा
है
मोहब्बत
में
शजर
सा
शाहज़ादा
क़बीले
से
बग़ावत
कर
रहा
है
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Shajar Abbas
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मुअर्रिख़ीन
मेरे
बाद
तुम
मेरे
बारे
लिखो
तो
लिखना
शजर
हिज्र
का
सताया
था
Shajar Abbas
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हर
बरस
दीपावली
पर
आप
से
फ़ुर्क़त
के
बाद
दिल
जलाकर
जिस्म
की
अलमारी
में
रखते
हैं
हम
Shajar Abbas
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जिसको
मिल
जाओ
तुम
उसे
सोचो
ख़ाक
ख़्वाहिश
हो
और
किसी
शय
की
Shajar Abbas
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इस
दु'आ
में
असर
ख़ुदा
दे
मुझे
जौन
सा
एलिया
बना
दे
मुझे
दर्द-ए-दिल
से
तड़प
रहा
हूँ
यहाँ
दर्द-ए-दिल
की
कोई
दवा
दे
मुझे
सिर्फ़
दावे
न
कर
ज़बान
से
तू
बा
वफ़ा
है
तो
फिर
वफ़ा
दे
मुझे
ज़ख़्म
माज़ी
के
भर
गए
हैं
सभी
ज़ख़्म
आकर
कोई
नया
दे
मुझे
दिल
लगाना
अगर
क़ुसूर
है
तो
दिल
लगाने
की
तू
सज़ा
दे
मुझे
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Shajar Abbas
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