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Shajar Abbas
jisko mil jaao tum use socho
jisko mil jaao tum use socho | जिसको मिल जाओ तुम उसे सोचो
- Shajar Abbas
जिसको
मिल
जाओ
तुम
उसे
सोचो
ख़ाक
ख़्वाहिश
हो
और
किसी
शय
की
- Shajar Abbas
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ग़ज़ल
पूरी
न
हो
चाहे,
मग़र
इतनी
सी
ख़्वाहिश
है
मुझे
इक
शे'र
कहना
है
तेरे
रुख़्सार
की
ख़ातिर
Siddharth Saaz
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हज़ारों
ख़्वाहिशें
ऐसी
कि
हर
ख़्वाहिश
पे
दम
निकले
बहुत
निकले
मिरे
अरमान
लेकिन
फिर
भी
कम
निकले
Mirza Ghalib
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फूल
से
लेकर
ये
धनिया
लाने
तक
के
इस
सफ़र
को
मुझको
तेरे
साथ
ही
तय
करने
की
ख़्वाहिश
है
पगली
Harsh saxena
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मैंने
ख़्वाबों
में
भी
तेरे
जिस्म
की
ख़्वाहिश
न
रक्खी
गर
तुझे
यूँँ
प्यार
कोई
और
कर
पाए
तो
कहना
Harsh saxena
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मदमस्त
महकते
फूलों
को
इन
कलियों
को
चूमा
जाए
इक
ख़्वाहिश
मेरी
यह
भी
है
तेरी
गलियों
में
घूमा
जाए
Akash Rajpoot
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उस
की
ख़्वाहिश
पे
तुम
को
भरोसा
भी
है
उस
के
होने
न
होने
का
झगड़ा
भी
है
लुत्फ़
आया
तुम्हें
गुमरही
ने
कहा
गुमरही
के
लिए
एक
ताज़ा
ग़ज़ल
Irfan Sattar
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सब
ख़्वाहिशें
पूरी
हों
'फ़राज़'
ऐसा
नहीं
है
जैसे
कई
अश'आर
मुकम्मल
नहीं
होते
Ahmad Faraz
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मेरा
अरमान
मेरी
ख़्वाहिश
नहीं
है
ये
दुनिया
मेरी
फ़रमाइश
नहीं
है
मैं
तेरे
ख़्वाब
वापस
कर
रहा
हूँ
मेरी
आँखों
में
गुंजाइश
नहीं
है
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Abrar Kashif
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ख़्वाहिश
सब
रखते
हैं
तुझको
पाने
की
और
फिर
अपनी
अपनी
क़िस्मत
होती
है
Bhaskar Shukla
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धूप
को
साया
ज़मीं
को
आसमाँ
करती
है
माँ
हाथ
रखकर
मेरे
सर
पर
सायबाँ
करती
है
माँ
मेरी
ख़्वाहिश
और
मेरी
ज़िद
उसके
क़दमों
पर
निसार
हाँ
की
गुंज़ाइश
न
हो
तो
फिर
भी
हाँ
करती
है
माँ
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Nawaz Deobandi
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दिल
तोड़ने
का
फ़न
नहीं
आता
मुझे
शजर
मैं
इश्क़
के
नगर
में
यूँँ
बेरोज़गार
हूँ
Shajar Abbas
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मलाल
इसका
नहीं
है
बिछड़
गया
तुझ
सेे
मलाल
ये
है
मैं
तुझ
सेे
बिछड़
के
ज़िंदा
हूँ
Shajar Abbas
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सालगिरह
पर
उसने
पहली
बार
मुझे
अपना
नंबर
लिख
के
दिया
था
तोहफ़े
में
Shajar Abbas
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मेरे
ख़याल
में
आओ
मेरे
गले
से
लगो
मता-ए-जाँ
बड़ी
मुश्किल
में
मुब्तिला
हूँ
मैं
Shajar Abbas
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सारे
बुज़ुर्ग
लोगों
का
सुन
एहतराम
कर
जो
लायक़-ए-सलाम
हैं
उनको
सलाम
कर
बेदार
होके
नींद
से
गफ़लत
की
ऐ
शजर
तू
अपने
बाबा
जाँ
का
ज़माने
में
नाम
कर
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Shajar Abbas
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