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Shajar Abbas
tumhaare ishq men had se guzarne vaala hooñ
tumhaare ishq men had se guzarne vaala hooñ | तुम्हारे इश्क़ में हद से गुज़रने वाला हूँ
- Shajar Abbas
तुम्हारे
इश्क़
में
हद
से
गुज़रने
वाला
हूँ
मैं
ख़ाक
हो
के
ज़मीं
पर
बिखरने
वाला
हूँ
बता
रहा
है
ये
तेज़ी
से
साँस
का
चलना
गले
लगाओ
मैं
अब
जल्द
मरने
वाला
हूँ
ये
जो
उदास
सी
तस्वीर
है
मुहब्बत
की
इसे
वफ़ा
के
तबस्सुम
से
भरने
वाला
हूँ
जो
ग़र्क़
करके
गए
थे
उन्हें
ख़बर
दे
दो
मैं
ग़र्क़
होके
दुबारा
उभरने
वाला
हूँ
- Shajar Abbas
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वक़्त,
वफ़ा,
हक़,
आँसू,
शिकवे
जाने
क्या
क्या
माँग
रहे
थे
एक
सहूलत
के
रिश्ते
से
हम
ही
ज़्यादा
माँग
रहे
थे
उसकी
आँखें
उसकी
बातें
उसके
लब
वो
चेहरा
उसका
हम
उसकी
हर
एक
अदास
अपना
हिस्सा
माँग
रहे
थे
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Shikha Pachouly
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कौन
उठाएगा
तुम्हारी
ये
जफ़ा
मेरे
बाद
याद
आएगी
बहुत
मेरी
वफ़ा
मेरे
बाद
Ameer Minai
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कोई
तो
पूछे
मोहब्बत
के
इन
फ़रिश्तों
से
वफ़ा
का
शौक़
ये
बिस्तर
पे
क्यूँ
उतर
आया
Harsh saxena
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इस
ज़माने
को
ज़माने
की
अदा
आती
है
और
इक
हम
है
हमें
सिर्फ़
वफ़ा
आती
है
Zubair Ali Tabish
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ये
सोच
कर
कोई
अहद-ए-वफ़ा
करो
हम
सेे
हम
एक
वादे
पे
'उम्रें
गुज़ार
देते
हैं
Waseem Barelvi
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'शाद'
ग़ैर-मुमकिन
है
शिकवा-ए-बुताँ
मुझ
से
मैं
ने
जिस
से
उल्फ़त
की
उस
को
बा-वफ़ा
पाया
Shaad Arfi
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बन
कर
कसक
चुभती
रही
दिल
में
मिरे
इक
आह
थी
ऐ
हम–नफ़स
मेरे
मुझे
तुझ
सेे
वफ़ा
की
चाह
थी
Dhiraj Singh 'Tahammul'
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वफ़ा
जिस
से
की
बे-वफ़ा
हो
गया
जिसे
बुत
बनाया
ख़ुदा
हो
गया
Hafeez Jalandhari
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वफ़ा
का
ज़ोर
अगर
बाज़ुओं
में
आ
जाए
चराग़
उड़ता
हुआ
जुगनुओं
में
आ
जाए
खिराजे
इश्क़,
कहीं
जा
के
तब
अदा
होगा
हमारा
ख़ून
अगर
आँसुओं
में
आ
जाए
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Hashim Raza Jalalpuri
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जिसकी
फ़ितरत
ही
बे
वफ़ाई
हो
उस
सेे
उम्मीद-ए-वफ़ा
क्या
करना
Ajeetendra Aazi Tamaam
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करिश्मा
करके
ज़माने
को
ये
दिखाना
है
हवा
के
दोश
पे
मैंने
दिया
जलाना
है
Shajar Abbas
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गुलशन-ए-क़ल्ब
में
गुलाब
थी
वो
मेरी
दुनिया
का
माहताब
थी
वो
नाम
की
तरह
हू-ब-हू
अपने
ख़ूब-सूरत
हाँ
बे
हिसाब
थी
वो
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Shajar Abbas
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कब
से
जुदा
हैं
ये
कभी
सोचा
है
आपने
हम
क्यूँ
ख़फ़ा
हैं
ये
कभी
सोचा
है
आपने
साए
न
जिनके
देख
सके
चाँद
कहकशाँ
वो
बे
रिदा
हैं
ये
कभी
सोचा
है
आपने
जो
ज़ख़्म
दे
रहे
हो
मोहब्बत
में
आप
वो
सब
ला
दवा
हैं
ये
कभी
सोचा
है
आपने
बेचैन
दिल
है
सदियों
से
बिस्तर
पे
हिज्र
के
हम
बे
ख़ुशा
हैं
ये
कभी
सोचा
है
आपने
गुलशन
शजर
क़मर
ये
ज़मीं
शम्स
कहकशाँ
क्यूँ
ग़म-ज़दा
हैं
ये
कभी
सोचा
है
आपने
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Shajar Abbas
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ख़ुद
को
पर्दे
में
रखो
तुम
हो
कनीज़-ए-ज़हरा
अपनी
शहज़ादी
को
माँ
दर्स-ए-हया
देती
है
Shajar Abbas
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आगे
निकल
के
इश्क़
की
सारी
हुदूद
से
कर
देंगे
इस
ज़मीं
को
मुनव्वर
सुजूद
से
अहद-ए-वफ़ा
ये
अहल-ए-फ़िलिस्तीन
ने
किया
हक़
अपना
लेंगे
ग़ासिब-ए-नस्ल-ए-यहूद
से
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Shajar Abbas
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