saare buzurg logon ka tu ehtiraam kar | सारे बुज़ुर्ग लोगों का तू एहतिराम कर

  - Shajar Abbas
सारेबुज़ुर्गलोगोंकातूएहतिरामकर
जोलायक़-ए-सलामहैंउनकोसलामकर
येकामरोज़एहल-ए-सुबहऔरशामकर
पैग़ाम-ए-अम्न-ओ-चैनज़मानेमेंआमकर
नज़रेंझुकीहोंलहजेमेंनर्मीहोबेपनाह
जबजबभीवालिदेनसेअपनेकलामकर
दिलसेसदायेआतीहैहरदममेरेशजर
वक्त-ए-ज़हूरगयाकुछइंतजामकर
बेदारहोकेनींदसेगफ़लतकीशजर
तूअपनेबाबाजाँकाज़मानेमेंनामकर
  - Shajar Abbas
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