bas chale inka to ye ahl-e-jahaan le jaayenge | बस चले इनका तो ये अहल-ए-जहाँ ले जाएँगे

  - Shajar Abbas
बसचलेइनकातोयेअहल-ए-जहाँलेजाएँगे
छीनकरहमसेेज़मीन-ओ-आसमाँलेजाएँगे
गुलशन-ए-ईजादतेराराहज़नयेलूटकर
सोचताहूँबाग़बाँआख़िरकहाँलेजाएँगे
तड़पेंगीदरियाकीमौजेंलबतकआनेकेलिए
उसजगहतश्नालबीकोतश्नगाँलेजाएँगे
अर्श-ए-सानीपरचमकनेकेलिएजान-ए-वफ़ा
हुस्नतुमसेेमाहताब-ओ-कहकशाँलेजाएँगे
जंग-ए-आज़ादीकोमुर्शिदमुस्कुराकरदेखना
फ़तहकरकेकमसिन-ओ-पीर-ओ-जवाँलेजाएँगे
हादसात-ए-इश्क़सेमहफूज़रखनेकेलिए
हमशजरख़ुदकोबचाकरकेकहाँलेजाएँगे
  - Shajar Abbas
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