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Shajar Abbas
parinde kahte hain sayyaad se rihaa kar de
parinde kahte hain sayyaad se rihaa kar de | परिंदे कहते हैं सय्याद से रिहा कर दे
- Shajar Abbas
परिंदे
कहते
हैं
सय्याद
से
रिहा
कर
दे
हमारे
बिन
ये
शजर
सूना
सूना
लगता
है
- Shajar Abbas
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गर
कोई
मुझ
सेे
आकर
कहता,
यार
उदासी
है
मैं
उसको
गले
लगाकर
कहता,
यार
उदासी
है
होता
दरवेश
अगर
मैं
तो
फिर
सारी
दो-पहरी
गलियों
में
सदा
लगाकर
कहता,
यार
उदासी
है
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Siddharth Saaz
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मेरे
नादाँ
दिल
उदासी
कोई
अच्छी
शय
नहीं
देख
सूखे
फूल
पर
आती
नहीं
हैं
तितलियाँ
Deepak Vikal
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दुख
की
दीमक
अगर
नहीं
लगती
ज़िन्दगी
किस
क़द्र
हसीं
लगती
वस्ल
को
लॉटरी
समझता
हूँ
लॉटरी
रोज़
तो
नहीं
लगती
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Azbar Safeer
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वो
रातें
चाँद
के
साथ
गईं
वो
बातें
चाँद
के
साथ
गईं
अब
सुख
के
सपने
क्या
देखें
जब
दुख
का
सूरज
सर
पर
हो
Ibn E Insha
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ख़मोशी
तो
यही
बतला
रही
है
उदासी
रास
मुझको
आ
रही
है
मुझे
जिन
ग़लतियों
से
सीखना
था
वही
फिर
ज़िंदगी
दोहरा
रही
है
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Vishal Singh Tabish
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सभी
के
साथ
दिखना
भी
मगर
सब
सेे
जुदा
रहना
भी
है
उसको
उदासी
साथ
भी
रखनी
है
और
तस्वीर
में
हँसना
भी
है
उसको
Kafeel Rana
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अब
उदास
फिरते
हो
सर्दियों
की
शामों
में
इस
तरह
तो
होता
है
इस
तरह
के
कामों
में
Shoaib Bin Aziz
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ईद
ख़ुशियों
का
दिन
सही
लेकिन
इक
उदासी
भी
साथ
लाती
है
ज़ख़्म
उभरते
हैं
जाने
कब
कब
के
जाने
किस
किस
की
याद
आती
है
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Farhat Ehsaas
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ज़ख़्म
है
दर्द
है
दवा
भी
है
जैसे
जंगल
है
रास्ता
भी
है
यूँँ
तो
वादे
हज़ार
करता
है
और
वो
शख़्स
भूलता
भी
है
हम
को
हर
सू
नज़र
भी
रखनी
है
और
तेरे
पास
बैठना
भी
है
यूँँ
भी
आता
नहीं
मुझे
रोना
और
मातम
की
इब्तिदा
भी
है
चूमने
हैं
पसंद
के
बादल
शाम
होते
ही
लौटना
भी
है
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Karan Sahar
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पहले
तो
वो
हाथ
पकड़कर
कमरे
से
बाहर
लाया
और
फिर
मुझको
इस
दुनिया
में
यार
अकेला
छोड़
गया
Tanoj Dadhich
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अपनी
फ़रियाद
लिख
रहा
हूँ
मैं
ग़म
को
आबाद
लिख
रहा
हूँ
मैं
एक
मुद्दत
से
कोह
के
दिल
पर
इस्म-ए-फ़रहाद
लिख
रहा
हूँ
मैं
आख़िरी
वक़्त
लब
पे
साहिल
के
लफ़्ज़-ए-इमदाद
लिख
रहा
हूँ
मैं
मुफ़्लिसी
आज
ही
अभी
से
तुझे
अपना
उस्ताद
लिख
रहा
हूँ
मैं
जिस्म
आज़ाद
फ़िक्र
क़ैदी
है
ख़ुद
को
आज़ाद
लिख
रहा
हूँ
मैं
क्यूँ
'शजर'
आज
अपनी
आँखों
को
शहर-ए-बग़दाद
लिख
रहा
हूँ
मैं
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Shajar Abbas
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इक
दिन
बैठ
के
फ़ुर्सत
से
मैं
सोचूँगा
क्यूँ
करता
हूँ
बात
मैं
ज़िंदा
लाशों
से
Shajar Abbas
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क्यूँँ
ज़ख़्म
दिल
का
मिटा
दूँ
भला
दवा
करके
ये
मेरे
पास
तेरी
आख़िरी
निशानी
हैं
Shajar Abbas
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यतीमों
पर
जो
शफ़क़त
कर
रहा
है
इलाही
की
इबादत
कर
रहा
है
अगर
ख़ामोश
है
जुल्म-ओ-सितम
पर
तो
ज़ालिम
की
हिमायत
कर
रहा
है
कोई
भूखा
न
सोए
बाद
मेरे
ये
इक
हाकिम
वसीयत
कर
रहा
है
सितम
हैरान
है
नोक-ए-जबल
से
बुरीदा
सर
तिलावत
कर
रहा
है
हुसैनी
हो
नहीं
सकता
शजर
वो
जो
महफ़िल
में
सियासत
कर
रहा
है
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Shajar Abbas
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पहले
उनकी
दीद
करनी
चाहिए
आपको
फिर
ईद
करनी
चाहिए
दिल
के
सर
पर
हिज्र
की
ज़र्बत
लगी
आपको
तज़्मीद
करनी
चाहिए
बेवफ़ाओं
से
वफ़ा
की
दोस्तों
किसलिए
उम्मीद
करनी
चाहिए
दिल
से
सुनिए
हज़रत-ए-दिल
आपको
हुस्न
की
तक़लीद
करनी
चाहिए
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Shajar Abbas
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