बाग़ में जो कली हिजाब में थी

  - Shajar Abbas
बाग़मेंजोकलीहिजाबमेंथी
उसकीख़ुशबूहरइकगुलाबमेंथी
आजवोज़ातबे-वफ़ानिकली
कलतलकजोवफ़ाकेबाबमेंथी
मौतबैठीथीमुतमइनसचहै
ज़िंदगानीहीइज़्तिराबमेंथी
हाथथा
मेंहुएहैमुफ़्लिसका
कलजोशहज़ादीमेरेख़्वाबमेंथी
सोचकरहूँमैंमुब्तिला-ए-इताब
क्यासबबथावोक्यूँइताबमेंथी
दफ़्नकरदीशजरनेज़ेर-ए-ज़मीं
आयत-ए-इश्क़जिसकिताबमेंथी
  - Shajar Abbas
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