ab vo soorat nazar nahin aati | अब वो सूरत नज़र नहीं आती

  - Shajar Abbas
अबवोसूरतनज़रनहींआती
आँखक्यूँमेरीभरनहींआती
दिलकेदरियामेंक्यूँमोहब्बतकी
अबकोईभीलहरनहींआती
फिररहीहैशहरमेंभटकीहुई
क्यूँख़ुशीमेरेघरनहींआती
यारमैंतोमरीज़-ए-इश्क़नहीं
'नींदक्यूँरातभरनहींआती'
गुलकीरगसेटपकरहाहैलहू
ख़ारकीचश्म-ए-तरनहींआती
जिसकामैंमुंतज़िरहूँबरसोंसे
क्यूँख़ुदावोसहरनहींआती
याइलाहीहोख़ैरक़ासिदकी
उनकीअबकुछख़बरनहींआती
आबलेज़ेरेपानिकलआए
औरमंज़िलनज़रनहींआती
मैंमुसलसलसदाएँदेताहूँ
औरसदालौटकरनहींआती
दिलनहींरहतासंगहोजाता
आहइससेअगरनहींआती
शा'इरीकरतेहोसहीहै'शजर'
परतुम्हेंख़ूबतरनहींआती
  - Shajar Abbas
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