hi
0
Search
Shayari
Writers
Events
Blog
Store
Help
Login
By:
00:00/00:00
Shadab Shabbiri
yuñ to rahte hain saath-saath magar
yuñ to rahte hain saath-saath magar | यूँँ तो रहते हैं साथ-साथ मगर
- Shadab Shabbiri
यूँँ
तो
रहते
हैं
साथ-साथ
मगर
आप
मिलते
कहाँ
हैं
फ़ुर्सत
में
- Shadab Shabbiri
Download Sher Image
गर
यही
है
उरूज
मेरा
तो
ऐ
ख़ुदा
फिर
ज़वाल
अच्छा
है
Shadab Shabbiri
Send
Download Image
1 Like
वो
बहुत
ही
महान
है
भाई
ये
फ़क़त
इक
गुमान
है
भाई
Shadab Shabbiri
Send
Download Image
0 Likes
तिरे
नज़दीक
आना
चाहता
हूँ
मैं
हाल-ए-दिल
सुनाना
चाहता
हूँ
तुझे
अपना
बनाना
चाहता
हूँ
मैं
जीने
का
बहाना
चाहता
हूँ
यहीं
कश्ती
जलाना
चाहता
हूँ
हुकूमत
फ़ातिहाना
चाहता
हूँ
मैं
इक
दर्पण
दिखाना
चाहता
हूँ
तुझे
तुझ
से
मिलाना
चाहता
हूँ
फ़साने
को
हक़ीक़त
में
बदल
कर
हक़ीक़त
सा
फ़साना
चाहता
हूँ
ठिकाने
तो
कई
मिल
जाएँ
लेकिन
तिरे
दिल
में
ठिकाना
चाहता
हूँ
ज़रा
कुछ
और
मोहलत
दे
मुझे
तू
मैं
हर
वा'दा
निभाना
चाहता
हूँ
मिरे
अश'आर
रूमानी
हैं
लेकिन
मैं
तेवर
बाग़ियाना
चाहता
हूँ
Read Full
Shadab Shabbiri
Download Image
0 Likes
दिल
के
ज़ख़्मों
को
इंदिमाल
नहीं
फिर
भी
मैं
दर्द
से
निढाल
नहीं
हम
ने
जब
कह
दिया
कि
हाँ
तो
हाँ
अब
नहीं
का
कोई
सवाल
नहीं
सिर्फ़
ख़ुशियाँ
ही
ज़द
पे
आती
हैं
रंज-ओ-ग़म
पर
मिरे
ज़वाल
नहीं
उसकी
सूरत
कई
से
मिलती
है
उसकी
सीरत
की
ही
मिसाल
नहीं
मुझको
वादों
पे
टाल
देते
हो
क्या
तुम्हें
कुछ
मिरा
ख़याल
नहीं
Read Full
Shadab Shabbiri
Download Image
0 Likes
किसी
का
रिन्द
मयख़ाना
किसी
का
किसी
की
आँख
पैमाना
किसी
का
किसी
की
जान
ले
लेगा
किसी
दिन
किसी
से
यूँँ
ही
शरमाना
किसी
का
किसी
की
ज़िन्दगी
बर्बाद
कर
दी
किसी
से
रूठ
कर
जाना
किसी
का
किसी
को
दे
गया
सहरा
नवर्दी
किसी
से
दूर
हो
जाना
किसी
का
किसी
के
साथ
जीने
की
तलब
में
किसी
पर
यूँँ
ही
मर
जाना
किसी
का
Read Full
Shadab Shabbiri
Download Image
0 Likes
Read More
Akbar Allahabadi
Krishna Bihari Noor
Shariq Kaifi
Mohammad Alvi
Anjum Rehbar
Abhishar Geeta Shukla
Ali Zaryoun
Zehra Nigaah
Amjad Islam Amjad
Asad Bhopali
Get Shayari on your Whatsapp
Dhoop Shayari
Eid Shayari
Muflisi Shayari
Lab Shayari
Jashn Shayari