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Shadab Shabbiri
dil ke zaKHmon ko indimaal nahin
dil ke zaKHmon ko indimaal nahin | दिल के ज़ख़्मों को इंदिमाल नहीं
- Shadab Shabbiri
दिल
के
ज़ख़्मों
को
इंदिमाल
नहीं
फिर
भी
मैं
दर्द
से
निढाल
नहीं
हम
ने
जब
कह
दिया
कि
हाँ
तो
हाँ
अब
नहीं
का
कोई
सवाल
नहीं
सिर्फ़
ख़ुशियाँ
ही
ज़द
पे
आती
हैं
रंज-ओ-ग़म
पर
मिरे
ज़वाल
नहीं
उसकी
सूरत
कई
से
मिलती
है
उसकी
सीरत
की
ही
मिसाल
नहीं
मुझको
वादों
पे
टाल
देते
हो
क्या
तुम्हें
कुछ
मिरा
ख़याल
नहीं
- Shadab Shabbiri
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बोसा
होंटों
का
मिल
गया
किस
को
दिल
में
कुछ
आज
दर्द
मीठा
है
Muneer Shikohabadi
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हम
आह
भी
करते
हैं
तो
हो
जाते
हैं
बदनाम
वो
क़त्ल
भी
करते
हैं
तो
चर्चा
नहीं
होता
Akbar Allahabadi
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दुख
तो
बहुत
मिले
हैं
मोहब्बत
नहीं
मिली
यानी
कि
जिस्म
मिल
गया
औरत
नहीं
मिली
मुझको
पिता
की
आँख
के
आँसू
तो
मिल
गए
मुझको
पिता
से
ज़ब्त
की
आदत
नहीं
मिली
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Abhishar Geeta Shukla
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अब
जो
कोई
पूछे
भी
तो
उस
से
क्या
शरह-ए-हालात
करें
दिल
ठहरे
तो
दर्द
सुनाएँ
दर्द
थमें
तो
बात
करें
Faiz Ahmad Faiz
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एक
दिन
की
ख़ुराक
है
मेरी
आप
के
हैं
जो
पूरे
साल
के
दुख
Varun Anand
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आह
को
चाहिए
इक
उम्र
असर
होने
तक
कौन
जीता
है
तिरी
ज़ुल्फ़
के
सर
होने
तक
Mirza Ghalib
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हम
अपने
दुख
को
गाने
लग
गए
हैं
मगर
इस
में
ज़माने
लग
गए
हैं
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Madan Mohan Danish
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यूँँ
दिल
को
तड़पने
का
कुछ
तो
है
सबब
आख़िर
या
दर्द
ने
करवट
ली
या
तुम
ने
इधर
देखा
Jigar Moradabadi
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कब
ठहरेगा
दर्द
ऐ
दिल
कब
रात
बसर
होगी
सुनते
थे
वो
आएँगे
सुनते
थे
सहर
होगी
Faiz Ahmad Faiz
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जिसकी
ख़ातिर
कितनी
रातें
सुलगाई
जिसके
दुख
में
दिल
जाने
क्यूँ
रोता
है
इक
दिन
हम
सेे
पूछ
रही
थी
वो
लड़की
प्यार
में
कोई
पागल
कैसे
होता
है
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Ritesh Rajwada
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ज़िन्दगी
भर
यही
इक
काम
किया
है
मैंने
अपने
दुख
दर्द
को
नीलाम
किया
है
मैंने
जुर्म
समझा
है
जिसे
अहले-ख़िरद
ने
शादाब
हाँ
वही
जुर्म
सरे-आम
किया
है
मैंने
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Shadab Shabbiri
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ज़माना
तो
उठाना
चाहता
है
मैं
पैर
अपने
जमाना
चाहता
हूँ
Shadab Shabbiri
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जाने
कब
होगा
दुबारा
यहाँ
आना
जानाँ
आ
इधर
बैठ
अभी
छोड़
बहाना
जानाँ
Shadab Shabbiri
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आप
बड़े
थे
आप
बड़े
हैं
मैं
छोटा
था
मैं
छोटा
हूँ
आप
खरे
थे
आप
खरे
हैं
मैं
खोटा
था
मैं
खोटा
हूँ
Shadab Shabbiri
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बेक़रारी
से
भी
ज़ियादा
कुछ
आज
कल
मुझको
बेक़रारी
है
Shadab Shabbiri
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