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Shadab Shabbiri
naKHuda hai KHuda nahin hai vo
naKHuda hai KHuda nahin hai vo | नाख़ुदा है, ख़ुदा नहीं है वो
- Shadab Shabbiri
नाख़ुदा
है,
ख़ुदा
नहीं
है
वो
अब
ख़ुदारा,
ख़ुदा
ख़ुदा
कीजे
- Shadab Shabbiri
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हम
नहीं
वो
जो
करें
ख़ून
का
दावा
तुझ
पर
बल्कि
पूछेगा
ख़ुदा
भी
तो
मुकर
जाएँगे
Sheikh Ibrahim Zauq
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किसी
के
तुम
हो
किसी
का
ख़ुदा
है
दुनिया
में
मेरे
नसीब
में
तुम
भी
नहीं
ख़ुदा
भी
नहीं
Akhtar Saeed Khan
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बाक़ी
न
दिल
में
कोई
भी
या
रब
हवस
रहे
चौदह
बरस
के
सिन
में
वो
लाखों
बरस
रहे
Ameer Minai
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आसमाँ
में
है
ख़ुदा,
क्या
सब
दुआएंँ
आसमाँ
तक
जा
रही
हैं
मेरी
इक
फ़रयाद
पूरी
हो
तो
मैं
मानूँ
वहाँ
तक
जा
रही
हैं
Saahir
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जहान
वालों
से
कह
दो
यहाँ
से
हट
जाएँ
ख़ुदा
के
और
मेरे
दरमियाँ
से
हट
जाएँ
Siraj Faisal Khan
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कितनी
सराहत
से
ख़ुदा
ने
की
तिरी
कारीगरी
शफ़्फ़ाफ़
शीशे
को
तराशा,
हूर
का
पैकर
दिया
Aditya Pandey
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ख़ुदा
ऐसे
एहसास
का
नाम
है
रहे
सामने
और
दिखाई
न
दे
Bashir Badr
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मैं
हूँ
सदियों
से
भटकता
हुआ
प्यासा
दरिया
ऐ
ख़ुदा
कुछ
तो
समुंदर
के
सिवा
दे
मुझ
को
Afzal Ali Afzal
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तुम्हारा
तो
ख़ुदास
राबता
है
तो
देखो
ना,
हमारे
दुख
बता
कर
Siddharth Saaz
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या
तो
भरम
बना
रहे
इतना
ख़ुदा
करे
इनकार
अपने
होने
से
वरना
ख़ुदा
करे
मुश्किल
है
मेरा
काम
तो
मिल
बाँटकर
करें
आधा
करा
दें
राम
जी
आधा
ख़ुदा
करे
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Vineet Aashna
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ज़िन्दगी
भर
यही
इक
काम
किया
है
मैंने
अपने
दुख
दर्द
को
नीलाम
किया
है
मैंने
जुर्म
समझा
है
जिसे
अहले-ख़िरद
ने
शादाब
हाँ
वही
जुर्म
सरे-आम
किया
है
मैंने
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Shadab Shabbiri
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जिसे
ज़िन्दगी
आप
कहते
हैं
उसकी
हक़ीक़त
में
कोई
हक़ीक़त
नहीं
है
Shadab Shabbiri
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आना
है
तो
फिर
आइए
शिकवे
भुलाइए
जाना
है
अगर
आप
को
तो
जाइए
चुपचाप
Shadab Shabbiri
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नहीं
नक़्शे
पे
है
दीवार
घर
की
मिरी
दीवार
पे
नक़्शा
बना
है
Shadab Shabbiri
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तिरे
नज़दीक
आना
चाहता
हूँ
मैं
हाल-ए-दिल
सुनाना
चाहता
हूँ
तुझे
अपना
बनाना
चाहता
हूँ
मैं
जीने
का
बहाना
चाहता
हूँ
यहीं
कश्ती
जलाना
चाहता
हूँ
हुकूमत
फ़ातिहाना
चाहता
हूँ
मैं
इक
दर्पण
दिखाना
चाहता
हूँ
तुझे
तुझ
से
मिलाना
चाहता
हूँ
फ़साने
को
हक़ीक़त
में
बदल
कर
हक़ीक़त
सा
फ़साना
चाहता
हूँ
ठिकाने
तो
कई
मिल
जाएँ
लेकिन
तिरे
दिल
में
ठिकाना
चाहता
हूँ
ज़रा
कुछ
और
मोहलत
दे
मुझे
तू
मैं
हर
वा'दा
निभाना
चाहता
हूँ
मिरे
अश'आर
रूमानी
हैं
लेकिन
मैं
तेवर
बाग़ियाना
चाहता
हूँ
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Shadab Shabbiri
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