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Shadab Shabbiri
qissa-e-zeest mukhtasar hai ab
qissa-e-zeest mukhtasar hai ab | क़िस्सा-ए-ज़ीस्त मुख़्तसर है अब
- Shadab Shabbiri
क़िस्सा-ए-ज़ीस्त
मुख़्तसर
है
अब
हर
दवा
यार
बे-असर
है
अब
- Shadab Shabbiri
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कहाँ
की
दोस्ती
किन
दोस्तों
की
बात
करते
हो
मियाँ
दुश्मन
नहीं
मिलता
कोई
अब
तो
ठिकाने
का
Waseem Barelvi
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क़फस
उदास
है
यारों
सबास
कुछ
तो
कहो
कहीं
तो
बहरे-खुदा
आज
ज़िक्र-ए-यार
चले
Faiz Ahmad Faiz
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दुआए
मांगते
हैं
इसीलिए
अपने
उजड़ने
की
हमें
तो
यार
तेरे
हाथ
से
तामीर
होना
हैं
Vishal Bagh
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अब
उस
सेे
दोस्ती
है
जिस
सेे
कल
मुहब्बत
थी
अब
इस
सेे
ज़्यादा
बुरा
वक़्त
कुछ
नहीं
है
दोस्त
Vishal Singh Tabish
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कुछ
तो
कर
आदाब-ए-महफ़िल
का
लिहाज़
यार
ये
पहलू
बदलना
छोड़
दे
Waseem Barelvi
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जैसे
पतवार
सफ़ीने
के
लिए
होते
हैं
दोस्त
अहबाब
तो
जीने
के
लिए
होते
हैं
इश्क़
में
कोई
तमाशा
नहीं
करना
होता
अश्क
जैसे
भी
हों
पीने
के
लिए
होते
हैं
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Khalid Nadeem Shani
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मेरा
हर
दिन
तेरी
फ़ुर्क़त
में
बसर
होता
है
यार
होना
तो
नहीं
चाहिए,
पर
होता
है
Harman Dinesh
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हैराँ
मैं
भी
हूँ
दोस्त
यूँँ
बालों
में
गजरा
देखकर
ये
फूल
आख़िर
कबसे
फूलों
को
पहनने
लग
गया
Neeraj Neer
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बात
करो
रूठे
यारों
से
सन्नाटों
से
डर
जाते
हैं
प्यार
अकेला
जी
लेता
है
दोस्त
अकेले
मर
जाते
हैं
Kumar Vishwas
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भले
ही
प्यार
हो
या
हिज्र
हो
या
फिर
सियासत
हो
कुछ
ऐसे
दोस्त
थे
हर
बात
पर
अश'आर
कहते
थे
Siddharth Saaz
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ज़हे
नसीब
तिरी
रहगुज़र
जो
मिल
जाती
तो
इस
तरह
न
ज़माने
में
दर
बदर
होता
Shadab Shabbiri
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नाख़ुदा
को
ख़ुदा
समझते
हो
क्या
कोई
नाख़ुदा,
ख़ुदा
सा
है
Shadab Shabbiri
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डर
गया
हूँ
मैं
यार
अंदर
से
कम
निकलता
हूँ
इस
लिए
घर
से
जाने
क्या
कुछ
गिरा
था
ऊपर
से
इक
बला
थी
जो
टल
गई
सर
से
जो
बराबर
नहीं
मिला
करता
आज
गुज़रा
मिरे
बराबर
से
बस
यही
सोच
कर
पड़ा
हूँ
मैं
कुछ
तो
मिलना
ही
है
तिरे
दर
से
हक़
बयानी
है
शा'इरी
मेरी
शा'इरी
छोड़
दूँ
तिरे
डर
से
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Shadab Shabbiri
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उसकी
यादें
चहार
जानिब
थीं
गाम-दर-गाम,
कू-ब-कू
था
वो
Shadab Shabbiri
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चाहत
ने
ला
के
छोड़ा
है
ऐसे
मुका़म
पर
मैं
भी
उदास
वो
भी
परेशाँ
है
आज
कल
उस
के
भी
रुख़
का
रंग
ज़रा
ज़र्द-ज़र्द
है
अपना
भी
तार-तार
गिरेबाँ
है
आज
कल
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Shadab Shabbiri
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