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Sandeep Thakur
likh ke ungli se dhool pe koi
likh ke ungli se dhool pe koi | लिख के उंगली से धूल पे कोई
- Sandeep Thakur
लिख
के
उंगली
से
धूल
पे
कोई
ख़ुद
हँसा
अपनी
भूल
पे
कोई
याद
करके
किसी
के
चेहरे
को
रख
गया
होंठ
फूल
पे
कोई
- Sandeep Thakur
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आग
अपने
ही
लगा
सकते
हैं
ग़ैर
तो
सिर्फ़
हवा
देते
हैं
Mohammad Alvi
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रो
रहा
था
गोद
में
अम्माँ
की
इक
तिफ़्ल-ए-हसीं
इस
तरह
पलकों
पे
आँसू
हो
रहे
थे
बे-क़रार
जैसे
दीवाली
की
शब
हल्की
हवा
के
सामने
गाँव
की
नीची
मुंडेरों
पर
चराग़ों
की
क़तार
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Ehsan Danish
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चराग़
घर
का
हो
महफ़िल
का
हो
कि
मंदिर
का
हवा
के
पास
कोई
मसलहत
नहीं
होती
Waseem Barelvi
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देख
तो
दिल
कि
जाँ
से
उठता
है
ये
धुआँ
सा
कहाँ
से
उठता
है
गोर
किस
दिलजले
की
है
ये
फ़लक
शोला
इक
सुब्ह
यां
से
उठता
है
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Meer Taqi Meer
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वक़्त
किस
तेज़ी
से
गुज़रा
रोज़-मर्रा
में
'मुनीर'
आज
कल
होता
गया
और
दिन
हवा
होते
गए
Muneer Niyazi
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इस
नदी
की
धार
में
ठंडी
हवा
आती
तो
है
नाव
जर्जर
ही
सही,
लहरों
से
टकराती
तो
है
Dushyant Kumar
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सभी
रिश्तें
मैं
यूँँ
बचाए
हूँ
जैसे
तड़पते
दियों
को
हवा
देते
रहना
Parul Singh "Noor"
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हवा
चली
तो
उसकी
शॉल
मेरी
छत
पे
आ
गिरी
ये
उस
बदन
के
साथ
मेरा
पहला
राब्ता
हुआ
Zia Mazkoor
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धुआँ
जो
कुछ
घरों
से
उठ
रहा
है
न
पूरे
शहर
पर
छाए
तो
कहना
Javed Akhtar
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बेहतर
है
मेरे
जाम
में
अब
ज़हर
मिला
दो
तुम
यूँँ
तो
मेरी
प्यास
को
कम
कर
नहीं
सकते
Saad Zaigham
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इश्क़
से
अपने
कुछ
चुने
लम्हें
अनकहे
और
अनसुने
लम्हें
आओ
मिलकर
जियें
दुबारा
से
सर्द
रातों
के
गुनगुने
लम्हें
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Sandeep Thakur
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सर्च
करना
है
मुझे
बे-कार
इंटरनेट
पर?
धड़कनों
में
अपनी
मेरा
नाम
कर
गूगल
कभी
Sandeep Thakur
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पहले
ख़ुद
को
एक
अच्छी
जाॅब
के
क़ाबिल
करूँँ
घर
ख़रीदूँ
कार
लूँ
फिर
पेश
तुझको
दिल
करूँँ
तू
कोई
एग्ज़ाम
है
क्या
पास
करना
है
तुझे
तू
कोई
डिग्री
है
क्या
पढ़कर
तुझे
हासिल
करूँँ
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Sandeep Thakur
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जाम
सिगरेट
कश
और
बस
कुछ
धुआँ
आख़िरश
और
बस
मौत
तक
ज़िंदगी
का
सफ़र
रात-दिन
कश्मकश
और
बस
पी
गया
पेड़
आँधी
मगर
गिर
पड़ा
खा
के
ग़श
और
बस
ज़िंदगी
जलती
सिगरेट
है
सिर्फ़
दो-चार
कश
और
बस
सूखते
पेड़
की
लकड़ियाँ
आख़िरी
पेशकश
और
बस
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Sandeep Thakur
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आज
पहली
दफ़ा
लगा
मुझको
वो
ज़रा
बे-वफ़ा
लगा
मुझको
बस
बिना
बात
ही
बिगड़ता
था
बेवजह
ही
ख़फ़ा
लगा
मुझको
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Sandeep Thakur
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