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Sachin Sharma
vo kis ko chahti hai aur kis se prem karti hai
vo kis ko chahti hai aur kis se prem karti hai | वो किस को चाहती है और किस सेे प्रेम करती है
- Sachin Sharma
वो
किस
को
चाहती
है
और
किस
सेे
प्रेम
करती
है
मुहब्बत
में
कोई
तुक्का
कभी
आसाँ
नहीं
होता
- Sachin Sharma
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दौलतें
मुद्दा
बनीं
या
ज़ात
आड़े
आ
गई
इश्क़
में
कोई
न
कोई
बात
आड़े
आ
गई
Baghi Vikas
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तुम्हीं
से
प्यार
मुझको
इसलिए
है
ज़माना
आज़मा
कर
आ
गया
हूँ
Divy Kamaldhwaj
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सँभलने
के
लिए
कर
ली
मुहब्बत
मगर
इस
में
फिसलना
चाहिए
था
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Divy Kamaldhwaj
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माना
के
मोहब्बत
का
छुपाना
है
मोहब्बत
चुपके
से
किसी
रोज़
जताने
के
लिए
आ
Ahmad Faraz
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इश्क़
के
रंग
में
ऐ
मेरे
यार
रंग
आया
फिर
आज
रंगों
का
तेहवार
रंग
हो
गुलाबी
या
हो
लाल
पीला
हरा
आ
लगा
दूँ
तुझे
भी
मैं
दो
चार
रंग
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Afzal Ali Afzal
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अदावत
मुहब्बत
रफ़ाक़त
नहीं
है
हमें
तुम
सेे
कोई
शिकायत
नहीं
है
दिलों
को
लगाने
लगे
हो
जहाँँ
तुम
वहाँ
तो
किसी
को
मुहब्बत
नहीं
है
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Tiwari Jitendra
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दीवार
है
दुनिया
इसे
राहों
से
हटा
दे
हर
रस्म-ए-मोहब्बत
को
मिटाने
के
लिए
आ
Hasrat Jaipuri
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हर
मुलाक़ात
पे
सीने
से
लगाने
वाले
कितने
प्यारे
हैं
मुझे
छोड़
के
जाने
वाले
ज़िंदगी
भर
की
मोहब्बत
का
सिला
ले
डूबे
कैसे
नादाँ
थे
तिरे
जान
से
जाने
वाले
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Vipul Kumar
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इक
और
इश्क़
की
नहीं
फुर्सत
मुझे
सनम
और
हो
भी
अब
अगर
तो
मेरा
मन
नहीं
बचा
Afzal Ali Afzal
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भुला
पाना
बहुत
मुश्किल
है
सब
कुछ
याद
रहता
है
मोहब्बत
करने
वाला
इस
लिए
बर्बाद
रहता
है
Munawwar Rana
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किस
को
चाहती
है
और
किस
सेे
प्रेम
करती
है
मुहब्बत
में
कोई
तुक्का
कभी
आसाँ
नहीं
होता
Sachin Sharma
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किसी
की
नज़र
का
दिवाना
बनूँ
किसी
के
लबों
का
तराना
बनूँ
तू
बन
कर
मुसाफ़िर
अगर
आ
गया
तिरी
रात
का
मैं
ठिकाना
बनूँ
दराज़ों
को
जो
भेदने
हैं
लगे
चले
तीर
और
मैं
निशाना
बनूँ
दे
दूँ
देह
अपनी
सभी
पुर्ज़े
भी
कि
मरते
हुए
भी
ख़ज़ाना
बनूँ
हमेशा
से
आँखों
में
चुभता
रहा
कभी
दर्द
कोई
पुराना
बनूँ
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Sachin Sharma
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शे'र
वो
हम
नहीं
सुनाएँगे
ऐब
सारे
नज़र
आ
जाएँगे
खींच
लेते
हैं,
हाथ
मौक़े
पर
हाथ
उन
से
नहीं
मिलाएँगे
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Sachin Sharma
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चाहिए
जिगरा
क़लम
खू़ँ
में
डुबाने
के
लिए
पी
लो
बातें
जौन
ख़ुद
को
ही
बनाने
के
लिए
Sachin Sharma
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हज़ारों
शे'र
कहने
को
तो
हो
जाते
सचिन
लेकिन
मगर
उन
शे'रों
में
मक़्ता
कभी
आसाँ
नहीं
होता
Sachin Sharma
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