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Amaan Javed
mujhe itni muhabbat ho chuki hai
mujhe itni muhabbat ho chuki hai | मुझे इतनी मुहब्बत हो चुकी है
- Amaan Javed
मुझे
इतनी
मुहब्बत
हो
चुकी
है
कि
मिल
पाने
की
हिम्मत
खो
गई
है
मेरा
दिल
है
अमावस
का
अँधेरा
तुम्हारी
याद
जैसे
चाँदनी
है
मैं
तुम
से
ले
सकूँ
कोई
इजाज़त
मुझे
इतनी
इजाज़त
कब
मिली
है
मिटा
दे
वहशतों
को
ज़िंदगी
से
तुम्हारे
हुस्न
में
वो
ताज़गी
है
मेरी
आँखों
को
ठंडक
दे
गई
है
तेरी
मुस्कान
में
जो
चाँदनी
है
तुम्हें
तो
हक़
भी
है
सब
भूलने
का
मेरा
तो
याद
करना
लाज़मी
है
जो
सब
कुछ
चाहिए
था
पा
लिया
है
मगर
तेरी
कसक
तो
रह
गई
है
तुम्हारा
दिल
अगर
अब
भी
न
पिघले
तो
फिर
किस
काम
की
ये
शा'इरी
है
मुझे
मालूम
है
तुम
क्या
कहोगी
ज़रा
सा
वाह
लिखना
बेरुख़ी
है
तेरा
होना
तेरा
मिलना
ग़ज़ब
है
ये
सब
महसूस
करना
जादुई
है
मुझे
ये
रात
छोटी
लग
रही
है
ग़ज़ल
ये
लंबी
होती
जा
रही
है
-अमान
- Amaan Javed
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मुझ
में
अब
मैं
नहीं
रही
बाक़ी
मैं
ने
चाहा
है
इस
क़दर
तुम
को
Ambreen Haseeb Ambar
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जिसकी
ख़ातिर
कितनी
रातें
सुलगाई
जिसके
दुख
में
दिल
जाने
क्यूँ
रोता
है
इक
दिन
हम
सेे
पूछ
रही
थी
वो
लड़की
प्यार
में
कोई
पागल
कैसे
होता
है
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Ritesh Rajwada
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अभी
से
पाँव
के
छाले
न
देखो
अभी
यारो
सफ़र
की
इब्तिदा
है
Ejaz Rahmani
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आज
भी
शायद
कोई
फूलों
का
तोहफ़ा
भेज
दे
तितलियाँ
मंडला
रही
हैं
काँच
के
गुल-दान
पर
Shakeb Jalali
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पास
मैं
जिसके
हूँ
वो
फिर
भी,
अच्छा
लड़का
ढूँढ़
रही
है
उसने
लगा
रक्खा
है
चश्मा,
और
वो
चश्मा
ढूँढ़
रही
है
फ़ोन
किया
मैंने
और
पूछा,
अब
तक
घर
से
क्यूँँ
नहीं
निकली
उस
ने
कहा
मुझ
सेे
मिलने
का,
एक
बहाना
ढूँढ़
रही
है
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Tanoj Dadhich
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किसी
को
घर
से
निकलते
ही
मिल
गई
मंज़िल
कोई
हमारी
तरह
उम्र
भर
सफ़र
में
रहा
Ahmad Faraz
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प्यार
करने
की
हिम्मत
नहीं
उनके
पास
और
हम
सेे
किनारा
भी
होता
नहीं
बात
सीधे
कही
भी
नहीं
जा
रही
और
कोई
इशारा
भी
होता
नहीं
उसको
उम्मीद
है
ऐश
होगी
बसर
साथ
में
जब
रहेगी
मिरे
वो
मगर
मुझपे
जितनी
मुहब्बत
बची
है
सखी
इतने
में
तो
गुज़ारा
भी
होता
नहीं
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Divyansh "Dard" Akbarabadi
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सिवा
इसके
कुछ
अच्छा
ही
नहीं
लगता
है
शामों
में
सफ़र
कैसा
भी
हो
घर
को
परिंदे
लौट
जाते
हैं
Aarush Sarkaar
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मेरे
होंठों
के
सब्र
से
पूछो
उसके
हाथों
से
गाल
तक
का
सफ़र
Mehshar Afridi
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मेरी
हर
बात
बे-असर
ही
रही
नक़्स
है
कुछ
मिरे
बयान
में
क्या
Jaun Elia
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गाल
आगे
कर
इंतिज़ार
न
कर
मेरे
रंगों
को
बेक़रार
न
कर
Amaan Javed
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उम्मीद
किसी
को
कभी
झूठी
नहीं
दी
है
सब
कुछ
दिया
तोहफ़े
में
अँगूठी
नहीं
दी
है
Amaan Javed
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आँखें
मूँदे
रहे
लब
को
सीते
गए
पेट
ख़ाली
रहे
ग़म
को
पीते
गए
शर्म
करते
हैं
अब
ख़ुद
की
हस्ती
पे
हम
ज़ुल्म
सहते
रहे
और
जीते
गए
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Amaan Javed
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'आशिक़
का
इंतिज़ार
था
दु'आओं
की
तरह
महबूब
चुप
रहा
मगर
ख़ुदाओं
की
तरह
Amaan Javed
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आती
है
बैठे
बैठे
तेरी
याद
इस
तरह
आता
है
जैसे
याद
बुज़ुर्गों
को
लखनऊ
Amaan Javed
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