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Saahir
tum muhabbat men jeete hue log ho
tum muhabbat men jeete hue log ho | तुम मुहब्बत में जीते हुए लोग हो
- Saahir
तुम
मुहब्बत
में
जीते
हुए
लोग
हो
तुम
नहीं
जानते
हार
जाने
का
दुख
- Saahir
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यतीमों
की
तरह
बस
पाल
रक्खा
है
इन्हें
हमने
हमें
जो
दुख
मिले
हैं
वो
हमारे
दुख
नहीं
लगते
किसी
की
आँख
में
रहकर
किसी
के
ख़्वाब
देखे
हैं
हजारों
कोशिशें
की
पर
किनारे
दुख
नहीं
लगते
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Rohit Gustakh
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दीदा
ओ
दिल
ने
दर्द
की
अपने
बात
भी
की
तो
किस
से
की
वो
तो
दर्द
का
बानी
ठहरा
वो
क्या
दर्द
बटाएगा
Ibn E Insha
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भला
तुम
कैसे
जानोगे
मिला
है
दर्द
जो
गहरा
वो
जैसे
नोचता
है
बाल
अपने
नोच
कर
देखो
Kushal "PARINDA"
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मशहूर
भी
हैं
बदनाम
भी
हैं
ख़ुशियों
के
नए
पैग़ाम
भी
हैं
कुछ
ग़म
के
बड़े
इनाम
भी
हैं
पढ़िए
तो
कहानी
काम
की
है
Anjum Barabankvi
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ग़म-ए-ज़माना
ने
मजबूर
कर
दिया
वर्ना
ये
आरज़ू
थी
कि
बस
तेरी
आरज़ू
करते
Akhtar Shirani
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हम
कुछ
ऐसे
उसके
आगे
अपनी
वफ़ा
रख
देते
हैं
बच्चे
जैसे
रेल
की
पटरी
पर
सिक्का
रख
देते
हैं
तस्वीर-ए-ग़म,
दिल
के
आँसू,
रंजो-नदामत,
तन्हाई
उसको
ख़त
लिखते
हैं
ख़त
में
हम
क्या
क्या
रख
देते
हैं
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Subhan Asad
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आन
के
इस
बीमार
को
देखे
तुझको
भी
तौफ़ीक़
हुई
लब
पर
उसके
नाम
था
तेरा
जब
भी
दर्द
शदीद
हुआ
Ibn E Insha
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ज़ख़्म
दिल
पर
हज़ार
करता
है
और
कहता
है
प्यार
करता
है
दर्द
दिल
में
उतर
गया
कैसे
कोई
अपना
ही
वार
करता
है
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Santosh S Singh
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उदासी
का
सबब
दो
चार
ग़म
होते
तो
कह
देता
फ़ुलाँ
को
भूल
बैठा
हूँ
फ़ुलाँ
की
याद
आती
है
Ashu Mishra
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ये
ग़म
हमको
पत्थर
कर
देगा
इक
दिन
कोई
आ
कर
हमें
रुलाओ
पहले
तो
Siddharth Saaz
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मेरे
जूते
फ़टे
हुए
हैं
लेकिन
मैं
जीत
चुका
हूँ
पहली
दौड़
इरादे
से
Saahir
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चुप
कराता
है
संसार
का
दुख
रोता
हूँ
जब
मैं
बेकार
का
दुख
छत
को
सर
पे
उठा
रक्खा
है
पर
कौन
पूछे
है
दीवार
का
दुख
बाद
छह
दिन
के
इतवार
आना
ढोना
छह
दिन
है
इतवार
का
दुख
आइए
बैठिए
तब
कहीं
फिर
पूछिये
आप
बीमार
का
दुख
है
असल
में
जुदाई
का
डर
जो
लग
रहा
है
तुम्हें
प्यार
का
दुख
म्यान
में
आँसू
देखे
लगा
तब
क़ैद
है
इस
में
तलवार
का
दुख
फ़ायदे
की
जगह
घाटा
होना
है
नहीं
ये
ही
व्यापार
का
दुख
उभरा
उभरा
ये
काग़ज़
बताए
उतरा
है
इक
क़लमकार
का
दुख
इक
तवायफ़
ने
हँसकर
के
देखा
छिप
गया
फिर
से
बाजार
का
दुख
चाहता
हूँ
कि
मैं
रोऊँ
तुझ
में
चाहिए
मुझको
अब
यार
का
दुख
चुप
करा
के
मुझे
रोने
वाली
का
निकल
आया
घरबार
का
दुख
चुन
सही
शख़्स
को
वरना
होगा
उम्र
भर
एक
इज़हार
का
दुख
रूठ
जाना
मनाना
नहीं
बस
ये
नहीं
होता
तक़रार
का
दुख
तुमको
हाँ
हो
ख़ुदा
करना
ऐसा
तुम
नहीं
जानो
इनकार
का
दुख
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Saahir
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वो
जो
हम
दोनों
ने
मिलकर
सोचे
थे
नाम
न
रखना
वो
तुम
अपने
बच्चों
के
Saahir
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मेरे
साथ
कभी
ऐसा
हो
ख़ुदा
करे
कोई
लड़की
मेरे
हक़
में
दु'आ
करे
Saahir
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ज़िंदा
रक्खो
मगर
इस
तरह
से
सताओ
मुझे
नाम
लो
उसका
और
उसकी
फ़ोटो
दिखाओ
मुझे
छोड़ती
है
निशाँ
हर
अधूरी
मोहब्बत
कहीं
सो
मिले
हैं
बदन
पर
ये
छह
सात
घाव
मुझे
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Saahir
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