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Saahir
choo nahin sakte hain shahzaa
choo nahin sakte hain shahzaa | छू नहीं सकते हैं शहज़ादी को हम जैसे कभी
- Saahir
छू
नहीं
सकते
हैं
शहज़ादी
को
हम
जैसे
कभी
इसलिए
हम
जैसे
करते
हैं
गुज़ारा,
देखकर
- Saahir
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मौत
सड़क
पर
राह
देखती
है
मेरी
अबके
गुज़रा
तो
फिर
मरना
पक्का
है
Saahir
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जैसे
बादल
किए
जाते
हैं
चाँद
के
संग
अठखेलियाँ
उस
सरकते
हुए
पल्लू
में
वो
यूँँ
चेहरा
छिपाती
रही
Saahir
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महलों
के
बाशिंदों
ने
कब
बाहर
ये
देखा
है
बस्ती
की
पगडंडी
पर
कितने
आदम
पड़े
हुए
हैं
जिन
जिन
लोगों
ने
शिरकत
की
है
मेरी
मय्यत
में
देखोगे
तो
जानोगे
सब
बन्दे
मरे
हुए
हैं
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Saahir
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इशारों
ही
इशारों
में
कोई
मुझे
हसीन
बात
कह
गया
मैं
तो
चला
गया
था
पर
ये
दिल
यहीं
पे
रह
गया
ये
आशिक़ी
है
दोस्त
और
इसका
ये
मिज़ाज
है
जो
रह
गया
वो
रह
गया
जो
ढह
गया
वो
ढह
गया
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Saahir
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मुझको
कितना
घोर
दुख
है
मेरे
चारों
ओर
दुख
है
चैन
चोरी
हो
गया
है
और
इसका
चोर
दुख
है
मैंने
चुप
रहना
कहा
था
क्यूँ
मचाया
शोर
दुख
है
जिनको
शब
अच्छी
लगे
है
उन
सभी
को
भोर
दुख
है
ज़िंदगी
की
डोरी
का
इक
छोर
सुख
इक
छोर
दुख
है
सुख
के
सारे
मोतियों
को
बाँधे
है
जो
डोर
दुख
है
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Saahir
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