rote hue maa baap ko laachaar chhodkar | रोते हुए माँ बाप को लाचार छोड़कर

  - Rituraj kumar
रोतेहुएमाँबापकोलाचारछोड़कर
परदेशमेंहमगएघरबारछोड़कर
तूहीतोइकबचाथामेराइसजहानमें
अबतूभीजारहाहैमेरेयारछोड़कर
पहलेतोतितलियोंनेबसायाचमनयहाँ
फिरतितलियांहीउड़गईंगुलज़ारछोड़कर
नाटकयेज़िंदगीकानहींभारहामुझे
सोजारहाहूँबीचमेंकिरदारछोड़कर
जैसेकिपत्तियाँहोंमगरफूलहीनहीं
वैसेहीसबमिलाहैहमेंप्यारछोड़कर
अच्छाहोजोयेदिलभीजलादोसनममेरा
जातेनहींसबूतगुनहगारछोड़कर
तुमसेेयेनौकरीभीभलाछूटतीनहीं
मैंरहाहूँशाहकादरबारछोड़कर
  - Rituraj kumar
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