ab koi kaanha kahaan jo jaan le is peer ko | अब कोई कान्हा कहाँ जो जान ले इस पीर को

  - Rituraj kumar
अबकोईकान्हाकहाँजोजानलेइसपीरको
इकदुशासनखींचताहैज़िंदगीकेचीरको
आजसूरतदेखमेरीअजनबीबननेलगे
देखकरजीतेथेजोकलतकमेरीतस्वीरको
ख़ूब-सूरतशैहोजितनीउतनीउस
मेंमुश्किलें
अबतुम्हींकोदेखलोयादेखलोकश्मीरको
ज़िन्दगीकीरेलगाड़ीगईआगेबहुत
मैंउतरनेजारहाहूँखींचकरज़ंजीरको
अबनहींचाराहैकुछइसकेसिवाऋतुराजजी
बसअकेलेबैठेरहिए,रोइएतक़दीरको
  - Rituraj kumar
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