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Rishabh Katariya
chhodkar apna bhi asar jaayenge
chhodkar apna bhi asar jaayenge | छोड़कर अपना भी असर जाएँगे
- Rishabh Katariya
छोड़कर
अपना
भी
असर
जाएँगे
या
तो
डूबेंगे
या
तो
तर
जाएँगे
प्रेम
एक
ताज
की
तरह
ही
तो
हैं
इसके
पीछे
कितने
ही
सर
जाएँगे
- Rishabh Katariya
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वो
चाहता
था
कि
कासा
ख़रीद
ले
मेरा
मैं
उस
के
ताज
की
क़ीमत
लगा
के
लौट
आया
Rahat Indori
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एक
कमी
थी
ताज-महल
में
मैंने
तिरी
तस्वीर
लगा
दी
Kaif Bhopali
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दिल्ली
में
आज
भीक
भी
मिलती
नहीं
उन्हें
था
कल
तलक
दिमाग़
जिन्हें
ताज-ओ-तख़्त
का
Meer Taqi Meer
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ये
क़त्ल-ए-आम
और
बे-इज़्न
क़त्ल-ए-आम
क्या
कहिए
ये
बिस्मिल
कैसे
बिस्मिल
हैं
जिन्हें
क़ातिल
नहीं
मिलता
वहाँ
कितनों
को
तख़्त
ओ
ताज
का
अरमाँ
है
क्या
कहिए
जहाँ
साइल
को
अक्सर
कासा-ए-साइल
नहीं
मिलता
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Asrar Ul Haq Majaz
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दिल
ऐसा
कि
सीधे
किए
जूते
भी
बड़ों
के
ज़िद
इतनी
कि
ख़ुद
ताज
उठा
कर
नहीं
पहना
Munawwar Rana
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उलझ
करके
तेरी
ज़ुल्फ़ों
में
यूँँ
आबाद
हो
जाऊँ
कि
जैसे
लखनऊ
का
मैं
अमीनाबाद
हो
जाऊँ
मैं
यमुना
की
तरह
तन्हा
निहारूँ
ताज
को
कब
तक
कोई
गंगा
मिले
तो
मैं
इलाहाबाद
हो
जाऊँ
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Ashraf Jahangeer
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बनाओ
ताजमहल
के
ब-जाए
ताश
महल
तमाम
उम्र
मुहब्बत
करो
गिराओ
बनाओ
Charagh Sharma
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हुस्न
ऐसा
है
कि
देखो
तो
लगे
ताज-महल
इस
पे
वो
शख़्स
सँवरता
भी
ग़ज़ल
जैसा
है
Manazir Ashiq Harganvi
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सच
की
डगर
पे
जब
भी
रक्खे
क़दम
किसी
ने
पहले
तो
देखी
ग़ुर्बत
फिर
तख़्त-ओ-ताज
देखा
Amaan Pathan
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दर्द
ज़ाया'
हुआ
है
तुम्हारे
बिना
सब
भुलाया
हुआ
है
तुम्हारे
बिना
तीन
हफ़्ते
से
बेमन
ही
संगीत
में
मन
लगाया
हुआ
है
तुम्हारे
बिना
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Rishabh Katariya
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वक़्त
का
यह
हसीं
सितम
तो
नहीं
ज़िन्दगी
का
ग़लत
कदम
तो
नहीं
बीतता
जा
रहा
जो
तुम्हारे
बिना
क्या
पता
आठवाँ
जनम
तो
नहीं
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Rishabh Katariya
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औषधि
जाने
कितनी
लगाई
गई
और
लाखों
रुपए
की
दवाई
गई
कोई
उपचार
जब
काम
ना
आ
सका
हमको
सूरत
तुम्हारी
दिखाई
गई
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Rishabh Katariya
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रोज़
संवाद
करता
नगर
से
तेरे
हर
घड़ी
ही
गुजरता
नगर
से
तेरे
हैं
यहाँ
की
हवा
में
ही
दीवानगी
कैसे
ना
प्रेम
करता
नगर
से
तेरे
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Rishabh Katariya
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दिन
बसर
हो
रहा
है
तुम्हारे
बिना
यह
असर
हो
रहा
है
तुम्हारे
बिना
अब
कई
लोग
आकर
के
बसने
लगे
मन
शहर
हो
रहा
है
तुम्हारे
बिना
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Rishabh Katariya
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