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RDX
mili hai seekh mujhe be-wafa ke jaanib se
mili hai seekh mujhe be-wafa ke jaanib se | मिली है सीख मुझे बे-वफ़ा के जानिब से
- RDX
मिली
है
सीख
मुझे
बे-वफ़ा
के
जानिब
से
दग़ा
किया
करो
ऐ
यार
तुम
मुहब्बत
है
- RDX
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उसने
पूछा
था
पहले
हाल
मेरा
फिर
किया
देर
तक
मलाल
मेरा
मैं
वफ़ा
को
हुनर
समझता
था
मुझपे
भारी
पड़ा
कमाल
मेरा
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Subhan Asad
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ये
तो
बढ़ती
ही
चली
जाती
है
मीआद-ए-सितम
ज़ुज़
हरीफ़ान-ए-सितम
किस
को
पुकारा
जाए
वक़्त
ने
एक
ही
नुक्ता
तो
किया
है
तालीम
हाकिम-ए-वक़त
को
मसनद
से
उतारा
जाए
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Jaun Elia
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क़ौम-ओ-मज़हब
क्या
किसी
का
और
क्या
है
रंग-ओ-नस्ल
ऐसी
बातें
छोड़
कर
बस
इल्म-ओ-फ़न
की
बात
हो
Sayan quraishi
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किताबें
बंद
करके
जब
मैं
बिस्तर
पर
पहुँचता
हूँ
तुम्हारी
याद
भी
आकर
बगल
में
लेट
जाती
है
Bhaskar Shukla
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तमाम
होश
ज़ब्त
इल्म
मस्लहत
के
बाद
भी
फिर
इक
ख़ता
मैं
कर
गया
था
माज़रत
के
बाद
भी
Pallav Mishra
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उतारा
दिल
के
वरक़
पर
तो
कितना
पछताया
वो
इंतिसाब
जो
पहले
बस
इक
किताब
पे
था
Aanis Moin
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किताबें,
रिसाले
न
अख़बार
पढ़ना
मगर
दिल
को
हर
रात
इक
बार
पढ़ना
Bashir Badr
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तमाम
उलझनों
में
भी
यूँँ
मुस्कुराता
है
न
जाने
इतना
हुनर
वो
कहाँ
से
लाता
है
Harsh saxena
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न
तीर्थ
जा
कर
न
धर्म
ग्रंथो
का
सार
पा
कर
सुकूँ
मिला
है
मुझे
तो
बस
तेरा
प्यार
पा
कर
ग़रीब
बच्चे
किताब
पढ़
कर
सँवर
रहे
हैं
अमीर
लड़के
बिगड़
रहे
हैं
दुलार
पा
कर
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Alankrat Srivastava
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बिछड़
गया
हूँ
मगर
याद
करता
रहता
हूँ
किताब
छोड़
चुका
हूँ
पढ़ाई
जारी
है
Ali Zaryoun
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तुम्हारे
दिल
में
कोई
ग़म
नहीं
लेकिन
हमारे
सामने
तो
झूठ
मत
बोलो
RDX
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ख़्वाब
के
आस
पास
रह
रह
कर
थक
गया
हूँ
उदास
रह
रह
कर
RDX
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उदासी
के
नशे
में
चूर
हैं
हम
ग़मों
का
जाम
पीकर
आ
रहे
हैं
RDX
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कोई
अपनी
ज़िंदगी
से
हार
बैठा
और
कोई
दिल-लगी
से
हार
बैठा
एक
ही
दिल
था
मिरे
अंदर
जिसे
मैं
उस
नज़र
की
सादगी
से
हार
बैठा
ढोल
पीटे
जा
रहा
था
मैं
जहाँ
में
पर
तिरी
इस
बंदगी
से
हार
बैठा
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RDX
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अपनी
रज़ा
अपनी
सहूलत
के
लिए
रिश्ता
रखा
था
बस
ज़रुरत
के
लिए
बिखरे
हुए
दिल
दे
उसे
ये
बद्दुआ
वो
उम्र
भर
तरसे
मुहब्बत
के
लिए
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RDX
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