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Ravi 'VEER'
patthar ko pighla saka hooñ
patthar ko pighla saka hooñ | पत्थर को पिघला सकता हूँ
- Ravi 'VEER'
पत्थर
को
पिघला
सकता
हूँ
सूखा
फूल
खिला
सकता
हूँ
तुम
ग़फ़लत
में
हो
मेरी
जाँ
तुमको
आज
भुला
सकता
हूँ
तुमने
मेरे
ख़त
फाड़े
हैं
मैं
भी
आग
लगा
सकता
हूँ
नाम
तेरा
महफ़िल
में
लेकर
सबके
होश
उड़ा
सकता
हूँ
मुझ
सेे
इश्क़
नहीं
करना
तुम
मैं
तुमको
उलझा
सकता
हूँ
सब
कहते
है
पागल
हूँ
मैं
किसको
आख़िर
भा
सकता
हूँ
वीर
कहानी
कैसी
भी
हो
मैं
किरदार
में
आ
सकता
हूँ
- Ravi 'VEER'
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ज़ेहन
से
यादों
के
लश्कर
जा
चुके
वो
मेरी
महफ़िल
से
उठ
कर
जा
चुके
मेरा
दिल
भी
जैसे
पाकिस्तान
है
सब
हुकूमत
करके
बाहर
जा
चुके
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Tehzeeb Hafi
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ख़ुशबू
से
किस
ज़बान
में
बातें
करेंगे
लोग
महफ़िल
में
ये
सवाल
तुझे
देख
कर
हुआ
Mansoor Usmani
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पहले
थोड़ी
मुश्किल
होगी
आगे
लेकिन
मंज़िल
होगी
सब
बाराती
शायर
होंगे
मेरी
शादी
महफ़िल
होगी
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Tanoj Dadhich
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शोर
की
इस
भीड़
में
ख़ामोश
तन्हाई
सी
तुम
ज़िन्दगी
है
धूप
तो
मद-मस्त
पुर्वाई
सी
तुम
चाहे
महफ़िल
में
रहूँ
चाहे
अकेले
में
रहूँ
गूँजती
रहती
हो
मुझ
में
शोख़
शहनाई
सी
तुम
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Kunwar Bechain
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पहले
ख़याल
रख
मिरा
मेहमान
कर
मुझे
फिर
अपनी
कोई
चाल
से
हैरान
कर
मुझे
हैं
कौन
आप,
याद
नहीं,कब
मिले
थे
हम
इतना
भी
ख़ुश
न
होइए
पहचान
कर
मुझे
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Divyansh "Dard" Akbarabadi
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ये
गूँगों
की
महफ़िल
है
निकलना
ही
पड़ेगा
क्या
इतनी
ख़ता
कम
है
कि
हम
बोल
पड़े
हैं
Waseem Barelvi
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बहुत
चल
बसे
यार
ऐ
ज़िंदगी
कोई
दिन
की
मेहमान
तू
रह
गई
Dagh Dehlvi
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ऐ
दिल
की
ख़लिश
चल
यूँँही
सही
चलता
तो
हूँ
उन
की
महफ़िल
में
उस
वक़्त
मुझे
चौंका
देना
जब
रंग
पे
महफ़िल
आ
जाए
Behzad Lakhnavi
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तुम
हुस्न
की
ख़ुद
इक
दुनिया
हो
शायद
ये
तुम्हें
मालूम
नहीं
महफ़िल
में
तुम्हारे
आने
से
हर
चीज़
पे
नूर
आ
जाता
है
Sahir Ludhianvi
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बात
करनी
मुझे
मुश्किल
कभी
ऐसी
तो
न
थी
जैसी
अब
है
तेरी
महफ़िल
कभी
ऐसी
तो
न
थी
Bahadur Shah Zafar
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उसे
लगता
रहा
बस
वक़्त
काटा
जा
रहा
है
पर
मुझे
बातों
ही
बातों
में
मुहब्बत
हो
गई
उस
सेे
Ravi 'VEER'
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सुकूँ
आराम
और
नींदें
उड़ा
कर
बैठ
जाएँगे
तेरी
ख़ातिर
यहाँ
सब
कुछ
लुटा
कर
बैठ
जाएँगे
सितम
कितने
ही
कर
ले
यार
तू
हम
हैं
तेरे
'आशिक़
झगड़
कर
भी
तेरे
पहलू
में
आकर
बैठ
जाएँगे
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Ravi 'VEER'
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वक़्त
ज़ख़्मों
को
भरेगा
एक
दिन
एक
दिन
मरहम
बिकेगा
मुफ्त
में
Ravi 'VEER'
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ख़ून
पसीना
दोनों
मिलकर
रोटी
बनके
आते
हैं
तब
जाकर
के
रोज़
हमारी
भूख
कहीं
मिट
पाती
है
Ravi 'VEER'
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जब
भी
उठी
हैं
नज़रें
मैंने
तुझे
ही
देखा
जब
भी
झुकी
हैं
नज़रे
आगे
तेरे
झुकी
है
Ravi 'VEER'
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