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Raunak Karn
kabhi kanghi kabhi clipe kabhi sampoo kabhi saabun
kabhi kanghi kabhi clipe kabhi sampoo kabhi saabun | कभी कंघी कभी क्लीपे कभी सम्पू कभी साबुन
- Raunak Karn
कभी
कंघी
कभी
क्लीपे
कभी
सम्पू
कभी
साबुन
अरे
अब
यार
कितना
ही
यहाँ
ख़र्चा
उतर
आया
- Raunak Karn
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रातें
किसी
याद
में
कटती
हैं
और
दिन
दफ़्तर
खा
जाता
है
दिल
जीने
पर
माएल
होता
है
तो
मौत
का
डर
खा
जाता
है
सच
पूछो
तो
'तहज़ीब
हाफ़ी'
मैं
ऐसे
दोस्त
से
आज़िज़
हूँ
मिलता
है
तो
बात
नहीं
करता
और
फोन
पे
सर
खा
जाता
है
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Tehzeeb Hafi
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शाम
ढलने
से
फ़क़त
शाम
नहीं
ढलती
है
उम्र
ढल
जाती
है
जल्दी
पलट
आना
मेरे
दोस्त
Ashfaq Nasir
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मैं
दिल
को
सख़्त
करके
उस
गली
जा
तो
रहा
हूँ
दोस्त
करूँँगा
क्या
अगर
वो
ही
शरारत
पर
उतर
आया
Harsh saxena
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मुझ
सेे
पहले
कोई
रंग
लगाए
उनको
कैसे
सह
लें
यार
भला
ये
होली
में
हम
Priya Dixit
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यार
इक
बार
परिंदों
को
हुकूमत
दे
दो
ये
किसी
शहर
को
मक़्तल
नहीं
होने
देंगे
ये
जो
चेहरे
हैं
यहाँ
चाँद
से
चेहरे
'ताबिश'
ये
मिरा
इश्क़
मुकम्मल
नहीं
होने
देंगे
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Abbas Tabish
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एक
ही
नदी
के
हैं
ये
दो
किनारे
दोस्तो
दोस्ताना
ज़िंदगी
से
मौत
से
यारी
रखो
Rahat Indori
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इस
से
पहले
कि
बे-वफ़ा
हो
जाएँ
क्यूँँ
न
ऐ
दोस्त
हम
जुदा
हो
जाएँ
Ahmad Faraz
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भले
ही
प्यार
हो
या
हिज्र
हो
या
फिर
सियासत
हो
कुछ
ऐसे
दोस्त
थे
हर
बात
पर
अश'आर
कहते
थे
Siddharth Saaz
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मेरा
हर
दिन
तेरी
फ़ुर्क़त
में
बसर
होता
है
यार
होना
तो
नहीं
चाहिए,
पर
होता
है
Harman Dinesh
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मिले
किसी
से
गिरे
जिस
भी
जाल
पर
मेरे
दोस्त
मैं
उसको
छोड़
चुका
उसके
हाल
पर
मेरे
दोस्त
ज़मीं
पे
सबका
मुक़द्दर
तो
मेरे
जैसा
नहीं
किसी
के
साथ
तो
होगा
वो
कॉल
पर
मेरे
दोस्त
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Ali Zaryoun
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भला
देखा
है
माँ
की
झुर्रियों
को
रुलाता
है
मुझे
वो
इक
सदी
से
नहीं
उठता
है
मुझ
सेे
बोझ
घर
का
कहीं
आराम
हो
अब
ख़ुद-कुशी
से
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Raunak Karn
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समझ
तो
है
नहीं
उसको
किसी
मजबूरियों
की
हाँ
नज़र
आते
कमी
वो
तो
सभी
नौकर
बदलता
है
Raunak Karn
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हमारे
साथ
में
तो
रौशनाई
भी
नहीं
आई
हमें
अब
देखते
ही
वो
वही
दावर
बदलता
है
Raunak Karn
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किसानों
की
यहाँ
पे
बात
कोई
भी
नहीं
सुनता
कहाँ
वो
गाड़ियों
जैसे
ज़मीं
बंजर
बदलता
है
Raunak Karn
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यहाँ
तो
वक़्त
पे
रिश्ता
निभाता
तो
नहीं
है
अब
ज़िया
की
बात
हो
फिर
भी
बताता
तो
नहीं
है
अब
Raunak Karn
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