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Raunak Karn
samajh to hai nahin usko kisi majbooriyon ki haan
samajh to hai nahin usko kisi majbooriyon ki haan | समझ तो है नहीं उसको किसी मजबूरियों की हाँ
- Raunak Karn
समझ
तो
है
नहीं
उसको
किसी
मजबूरियों
की
हाँ
नज़र
आते
कमी
वो
तो
सभी
नौकर
बदलता
है
- Raunak Karn
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जिस
की
जानिब
'अदा'
नज़र
न
उठी
हाल
उस
का
भी
मेरे
हाल
सा
था
Ada Jafarey
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वो
दिल-नवाज़
है
लेकिन
नज़र-शनास
नहीं
मिरा
इलाज
मिरे
चारा-गर
के
पास
नहीं
Nasir Kazmi
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नज़र
में
रखना
कहीं
कोई
ग़म
शनास
गाहक
मुझे
सुख़न
बेचना
है
ख़र्चा
निकालना
है
Umair Najmi
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कम
अज़
कम
इक
ज़माना
चाहता
हूँ
कि
तुम
को
भूल
जाना
चाहता
हूँ
ख़ुदारा
मुझ
को
तन्हा
छोड़
दीजे
मैं
खुल
कर
मुस्कुराना
चाहता
हूँ
सरासर
आप
हूँ
मद्दे
मुक़ाबिल
ख़ुदी
ख़ुद
को
हराना
चाहता
हूँ
मेरे
हक़
में
उरूस-ए-शब
है
मक़्तल
सो
उस
से
लब
मिलाना
चाहता
हूँ
ये
आलम
है,
कि
अपने
ही
लहू
में
सरासर
डूब
जाना
चाहता
हूँ
सुना
है
तोड़ते
हो
दिल
सभों
का
सो
तुम
से
दिल
लगाना
चाहता
हूँ
उसी
बज़्म-ए-तरब
की
आरज़ू
है
वही
मंज़र
पुराना
चाहता
हूँ
नज़र
से
तीर
फैंको
हो,
सो
मैं
भी
जिगर
पर
तीर
खाना
चाहता
हूँ
चराग़ों
को
पयाम-ए-ख़ामुशी
दे
तेरे
नज़दीक
आना
चाहता
हूँ
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Kazim Rizvi
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न
कोई
बीन
बजाई
न
टोकरी
खोली
बस
एक
फोन
मिलाने
पे
साँप
बैठा
है
कोई
भी
लड़की
अकेली
नज़र
नहीं
आती
यहाँ
हर
एक
ख़जाने
पे
साँप
बैठा
है
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Muzdum Khan
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तुम्हारी
राह
में
मिट्टी
के
घर
नहीं
आते
इसलिए
तो
तुम्हें
हम
नज़र
नहीं
आते
Waseem Barelvi
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सब
लोग
जिधर
वो
हैं
उधर
देख
रहे
हैं
हम
देखने
वालों
की
नज़र
देख
रहे
हैं
Dagh Dehlvi
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साक़ी
कुछ
आज
तुझ
को
ख़बर
है
बसंत
की
हर
सू
बहार
पेश-ए-नज़र
है
बसंत
की
Ufuq Lakhnavi
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लग
गई
मुझको
नज़र
बेशक़
तुम्हारी
आईनों
मैं
बहुत
ख़ुश
था
किसी
इक
सिलसिले
से
उन
दिनों
Aarush Sarkaar
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हम
भी
ख़ुद
को
तबाह
कर
लेते
तुम
इधर
भी
निगाह
कर
लेते
Behzad Lakhnavi
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हमें
भी
ग़म
जरा
तुमको
सुनाना
था
हमें
तो
ज़ख़्म
भी
अपना
दिखाना
था
सभी
फोटो
तेरी
हमने
जलाई
है
मगर
तुमको
न
भूले
ये
बताना
था
नज़र
आए
नहीं
उनको
कभी
भी
हम
नज़र
में
बस
मेरी
उनका
ठीकाना
था
रहा
है
ख़त्म
डाटा
फोन
में
उनके
अरे
भाई
यही
उनका
बहाना
था
गई
मुस्कान
अब
तो
शक्ल
से
भी
यूँँ
निगाहें
कह
रहे
रौनक
दीवाना
था
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Raunak Karn
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पास
आ
मंज़र
बदल
कर
इश्क़
में
तू
यूँँ
फिसल
कर
छोड़
दे
तू
दर्द
को
अब
मुस्कुरा
नभ
में
उछल
कर
रेत
में
पानी
न
होता
हम
न
रोते
जो
टहल
कर
देख
कर
तुम
मेरी
हालत
गुज़री
हो
दिल
से
निकल
कर
नाम
को
तू
छोड़
रौनक
ख़ामुशी
से
तू
ग़ज़ल
कर
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Raunak Karn
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क्या
कहे
अब
उस
सेे
भला
हम
अब
वही
कुछ
सुनती
कहाँ
है
Raunak Karn
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न
है
राह
पे
आँखें
यार
आख़िर
गई
है
नज़र
भी
ऐसे
बिगाड़ी
Raunak Karn
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कभी
भी
प्यार
को
अपने
नहीं
भाई
जताता
है
मुसीबत
में
पड़े
बहना
तो
उसको
वो
बचाता
है
Raunak Karn
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