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Raunak Karn
bhala dekha hai maa kii jhurriyon ko
bhala dekha hai maa kii jhurriyon ko | भला देखा है माँ की झुर्रियों को
- Raunak Karn
भला
देखा
है
माँ
की
झुर्रियों
को
रुलाता
है
मुझे
वो
इक
सदी
से
नहीं
उठता
है
मुझ
सेे
बोझ
घर
का
कहीं
आराम
हो
अब
ख़ुद-कुशी
से
- Raunak Karn
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फूलों
की
सेज
पर
ज़रा
आराम
क्या
किया
उस
गुल-बदन
पे
नक़्श
उठ
आए
गुलाब
के
Adil Mansuri
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उसूली
तौर
पे
मर
जाना
चाहिए
था
मगर
मुझे
सुकून
मिला
है
तुझे
जुदा
कर
के
Ali Zaryoun
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जौन
तुम्हें
ये
दौर
मुबारक,
दूर
ग़म-ए-अय्याम
से
हो
एक
पागल
लड़की
को
भुला
कर
अब
तो
बड़े
आराम
से
हो
Jaun Elia
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बैठे
हैं
चैन
से
कहीं
जाना
तो
है
नहीं
हम
बे-घरों
का
कोई
ठिकाना
तो
है
नहीं
तुम
भी
हो
बीते
वक़्त
के
मानिंद
हू-ब-हू
तुम
ने
भी
याद
आना
है
आना
तो
है
नहीं
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Rehman Faris
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ये
कहते
हो
तिरे
जाने
से
दिल
को
चैन
आएगा
तो
जाता
हूँ,
ख़ुदा
हाफ़िज़!
मगर
तुम
झूठ
कहते
हो
Zubair Ali Tabish
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हम
रातों
को
उठ
उठ
के
जिनके
लिए
रोते
हैं
वो
ग़ैर
की
बाँहों
में
आराम
से
सोते
हैं
Hasrat Jaipuri
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तुम
न
आए
तो
क्या
सहर
न
हुई
हाँ
मगर
चैन
से
बसर
न
हुई
मेरा
नाला
सुना
ज़माने
ने
एक
तुम
हो
जिसे
ख़बर
न
हुई
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Mirza Ghalib
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ये
मुझे
चैन
क्यूँँॅं
नहीं
पड़ता
एक
ही
शख़्स
था
जहान
में
क्या
Jaun Elia
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सिवाए
तालियों
के
कुछ
नहीं
मिलता
ग़ज़लगोई
फ़क़त
धंधा
सुकूँ
का
है
Neeraj Neer
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होगा
किसी
दीवार
के
साए
में
पड़ा
'मीर'
क्या
रब्त
मोहब्बत
से
उस
आराम-तलब
को
Meer Taqi Meer
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हवा
में
धूल
के
जैसे
यही
ग़म
जो
मचलता
है
हमें
ये
देखते
ही
यार
अब
तो
साथ
चलता
है
Raunak Karn
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ग़ज़ल
जैसी
लगी
वो
भी
ज़रा
नमकीन
मीठी
सी
ज़रा
लंबी
ज़रा
गोरी,
अरे
काली
निगाहों
में
Raunak Karn
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हमें
ये
बात
खलती
है,
हम
उसके
साथ
जलते
हैं
हमें
जो
छूता
है
अब
वो
तो
उसके
हाथ
जलते
हैं
Raunak Karn
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यहाँ
पे
अब
नज़र
में
कुछ
दिखाई
तो
नहीं
देता
यहाँ
सबके
नज़र
में
यार
अब
पैसा
उतर
आया
Raunak Karn
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हमारा
था
कभी
जो
सिर्फ़
अब
तो
वो
पराया
है
बचे
थे
अश्क
आँखों
में
उसे
भी
अब
बहाएा
है
नहीं
कहते
कभी
भी
दर्द
हम
अपना
तुझी
से
अब
मगर
अब
क्या
करें,
दिल
ने
तुझे
सब
कुछ
सुनाया
है
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Raunak Karn
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