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Raunak Karn
hamaara tha kabhi jo sirf ab to vo paraaya hai
hamaara tha kabhi jo sirf ab to vo paraaya hai | हमारा था कभी जो सिर्फ़ अब तो वो पराया है
- Raunak Karn
हमारा
था
कभी
जो
सिर्फ़
अब
तो
वो
पराया
है
बचे
थे
अश्क
आँखों
में
उसे
भी
अब
बहाएा
है
नहीं
कहते
कभी
भी
दर्द
हम
अपना
तुझी
से
अब
मगर
अब
क्या
करें,
दिल
ने
तुझे
सब
कुछ
सुनाया
है
- Raunak Karn
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उम्र
गुज़री
दवाएँ
करते
'मीर'
दर्द-ए-दिल
का
हुआ
न
चारा
हनूज़
Meer Taqi Meer
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हम
मिल
के
आ
गए
मगर
अच्छा
नहीं
लगा
फिर
यूँँ
हुआ
असर
कि
घर
अच्छा
नहीं
लगा
इक
बार
दिल
में
तुझ
सेे
जुदाई
का
डर
बना
फिर
दूसरा
कोई
भी
डर
अच्छा
नहीं
लगा
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Shriyansh Qaabiz
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न
तेरे
आने
से
मेरा
शबाब
लौटा
है
न
दिल
लगाने
से
मेरा
शबाब
लौटा
है
क़सम
ख़ुदा
की
बताता
हूँ
राज़
ये
तुमको
नहारी
खाने
से
मेरा
शबाब
लौटा
है
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Paplu Lucknawi
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गले
मिलना
न
मिलना
तो
तेरी
मर्ज़ी
है
लेकिन
तेरे
चेहरे
से
लगता
है
तेरा
दिल
कर
रहा
है
Tehzeeb Hafi
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शाम-ए-फ़िराक़
अब
न
पूछ
आई
और
आ
के
टल
गई
दिल
था
कि
फिर
बहल
गया
जाँ
थी
कि
फिर
सँभल
गई
Faiz Ahmad Faiz
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रात
यूँँ
दिल
में
तिरी
खोई
हुई
याद
आई
जैसे
वीराने
में
चुपके
से
बहार
आ
जाए
Faiz Ahmad Faiz
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बन
कर
कसक
चुभती
रही
दिल
में
मिरे
इक
आह
थी
ऐ
हम–नफ़स
मेरे
मुझे
तुझ
सेे
वफ़ा
की
चाह
थी
Dhiraj Singh 'Tahammul'
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आप
चाहें
तो
कहीं
और
भी
रह
सकते
हैं
दिल
हमारा
है
तो
मर्ज़ी
भी
हमारी
होगी
Shamsul Hasan ShamS
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रातें
किसी
याद
में
कटती
हैं
और
दिन
दफ़्तर
खा
जाता
है
दिल
जीने
पर
माएल
होता
है
तो
मौत
का
डर
खा
जाता
है
सच
पूछो
तो
'तहज़ीब
हाफ़ी'
मैं
ऐसे
दोस्त
से
आज़िज़
हूँ
मिलता
है
तो
बात
नहीं
करता
और
फोन
पे
सर
खा
जाता
है
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Tehzeeb Hafi
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दिल
को
तेरी
चाहत
पे
भरोसा
भी
बहुत
है
और
तुझ
से
बिछड़
जाने
का
डर
भी
नहीं
जाता
Ahmad Faraz
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पता
तो
था
हमें
तेरी
हक़ीक़त
भी
बहुत
पहले
दिलों
की
बात
से
लेकिन
यहाँ
पे
कौन
जीता
है
Raunak Karn
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भला
देखा
है
माँ
की
झुर्रियों
को
रुलाता
है
मुझे
वो
इक
सदी
से
नहीं
उठता
है
मुझ
सेे
बोझ
घर
का
कहीं
आराम
हो
अब
ख़ुद-कुशी
से
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Raunak Karn
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सवालों
से
बच
कर
ख़ुदा
लापता
है
ज़माना
ये
सारा
ही
बस
देखता
है
ये
मासूम
बच्चे
भी
अब
मर
रहे
हैं
बताओ
न
इन
बच्चों
की
क्या
ख़ता
है
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Raunak Karn
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हाथ
में
जो
हाथ
होता
ये
जहाँ
फिर
छोड़
देते
Raunak Karn
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हमीं
कहें,
सभी
कहें,
पता
कुछ
नहीं
यहाँ
जभी
कहें,
सही
कहें,
ख़ता
कुछ
नहीं
यहाँ
Raunak Karn
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