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Raunak Karn
bol kis li.e zikr-e-zahar yuñ sataati hai
bol kis li.e zikr-e-zahar yuñ sataati hai | बोल किस लिए ज़िक्र-ए-ज़हर यूँँ सताती है
- Raunak Karn
बोल
किस
लिए
ज़िक्र-ए-ज़हर
यूँँ
सताती
है
वो
ख़याल
में
'रौनक'
रोज़-रोज़
आती
है
- Raunak Karn
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सच
घटे
या
बढ़े
तो
सच
न
रहे
झूट
की
कोई
इंतिहा
ही
नहीं
Krishna Bihari Noor
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लो
हमारा
जवाब
ले
जाओ
ये
महकता
गुलाब
ले
जाओ
Aleena Itrat
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तुम
हुस्न
की
ख़ुद
इक
दुनिया
हो
शायद
ये
तुम्हें
मालूम
नहीं
महफ़िल
में
तुम्हारे
आने
से
हर
चीज़
पे
नूर
आ
जाता
है
Sahir Ludhianvi
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देखो
मौत
का
मौसम
आने
वाला
है
ज़िंदा
रहना
सब
सेे
बड़ी
लड़ाई
है
Shadab Asghar
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किसी
की
बर्क़-ए-नज़र
से
न
बिजलियों
से
जले
कुछ
इस
तरह
की
हो
ता'मीर
आशियाने
की
Anwar Taban
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दुनिया
ने
तजरबात-ओ-हवादिस
की
शक्ल
में
जो
कुछ
मुझे
दिया
है
वो
लौटा
रहा
हूँ
मैं
Sahir Ludhianvi
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जहल-ए-ख़िरद
ने
दिन
ये
दिखाए
घट
गए
इंसाँ
बढ़
गए
साए
Jigar Moradabadi
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शहर
का
तब्दील
होना
शाद
रहना
और
उदास
रौनक़ें
जितनी
यहाँ
हैं
औरतों
के
दम
से
हैं
Muneer Niyazi
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बे-ख़ुदी
में
ले
लिया
बोसा
ख़ता
कीजे
मुआ'फ़
ये
दिल-ए-बेताब
की
सारी
ख़ता
थी
मैं
न
था
Bahadur Shah Zafar
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देखो
देखो
जानम
हम
दिल
अपना
तेरे
लिए
लाए
सोचो
सोचो
दुनिया
में
क्यूँँ
आए
तेरे
लिए
आए
Rahat Indori
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अब
कभी
पूछ
ले
यार,
मेरा
गुनाह
क्या
इस
क़दर
उल्फ़तों
का
सज़ा
दे
गया
मुझे
Raunak Karn
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सवालों
से
बच
कर
ख़ुदा
लापता
है
ज़माना
ये
सारा
ही
बस
देखता
है
ये
मासूम
बच्चे
जो
मरते
हैं
हरदम
बताओ
मुझे
क्या
ही
इनकी
ख़ता
है
अनाथों
की
लंबी
क़तारें
हैं
देखो
पिता
आँखें
अपनी
नहीं
खोलता
है
ये
चुप
चुप
रहे
हैं
दबाया
है
इनको
दबे
लोगों
को
कौन
ही
देखता
है
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Raunak Karn
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न
ख़ुद
को
नज़र
में
गिरा
ही
सके
हम
न
ख़ुद
को
कही
पे
बिठा
ही
सके
हम
बिना
दोस्ती
के
कटी
उम्र
सारी
न
तो
ज़ख़्म
दिल
के
दिखा
ही
सके
हम
रही
आँख
नम
हर
समय
यार
दिल
की
न
ख़ुद
को
नज़र
में
झुका
ही
सके
हम
न
हँसते
हमें
तो
न
होता
यही
ग़म
रहा
जो
कि
सब
को
रुला
ही
सके
हम
न
थी
शोर
करने
कि
आदत
हमें
तब
न
ही
तब
किसी
आँख
आ
ही
सके
हम
गले
से
लगाया
पनस
को
वही
पर
जहाँ
आबरू
को
लुटा
ही
सके
हम
रही
यार
कोशिश
यही
हर
समय
बस
न
ख़ुद
को
दिलों
में
बिठा
ही
सके
हम
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Raunak Karn
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यही
सोचा
अरे
ये
प्यार
आख़िर
हो
गया
कैसे
रुकावट
प्यार
की
अब
तो
तेरी
इस
ज़ात
में
होगी
Raunak Karn
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मैं
बच
के
इश्क़
के
रस्ते
से
चलना
चाहता
हूँ
मगर
इक
शख़्स
इन
आँखों
में
बसता
जा
रहा
है
Raunak Karn
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