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Raunak Karn
kisi dil men bitha KHud ko yahaañ pachta rahe hain ham
kisi dil men bitha KHud ko yahaañ pachta rahe hain ham | किसी दिल में बिठा ख़ुद को यहाँ पछता रहे हैं हम
- Raunak Karn
किसी
दिल
में
बिठा
ख़ुद
को
यहाँ
पछता
रहे
हैं
हम
अकेले
ही
अकेले
दर्द
अपना
गा
रहे
हैं
हम
यही
जो
नज़्म
अब
भाई
पढ़े
जो
जा
रहे
हो
तुम
नहीं
है
नज़्म,
ये
है
दर्द
अब
बतला
रहे
हैं
हम
ग़ज़ल
की
भी
झलक
शायद
उभर
आख़िर
रही
है
अब
गए
है
यार
हम
पगला
यहाँ
तुतला
रहे
हैं
हम
- Raunak Karn
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देखो
तो
चश्म-ए-यार
की
जादू-निगाहियाँ
बेहोश
इक
नज़र
में
हुई
अंजुमन
तमाम
Hasrat Mohani
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वो
एक
दिन
जो
तुझे
सोचने
में
गुज़रा
था
तमाम
उम्र
उसी
दिन
की
तर्जुमानी
है
Abhishek shukla
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चलता
रहने
दो
मियाँ
सिलसिला
दिलदारी
का
आशिक़ी
दीन
नहीं
है
कि
मुकम्मल
हो
जाए
Abbas Tabish
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उस
के
होंटों
पे
रख
के
होंट
अपने
बात
ही
हम
तमाम
कर
रहे
हैं
Jaun Elia
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अंजाम
उसके
हाथ
है
आग़ाज़
करके
देख
भीगे
हुए
परों
से
ही
परवाज़
करके
देख
Nawaz Deobandi
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तमाम
नाख़ुदा
साहिल
से
दूर
हो
जाएँ
समुंदरों
से
अकेले
में
बात
करनी
है
Tehzeeb Hafi
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भरे
हुए
जाम
पर
सुराही
का
सर
झुका
तो
बुरा
लगेगा
जिसे
तेरी
आरज़ू
नहीं
तू
उसे
मिला
तो
बुरा
लगेगा
ये
आख़िरी
कंपकंपाता
जुमला
कि
इस
तअ'ल्लुक़
को
ख़त्म
कर
दो
बड़े
जतन
से
कहा
है
उस
ने
नहीं
किया
तो
बुरा
लगेगा
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Zubair Ali Tabish
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मानी
हैं
मैं
ने
सैकड़ों
बातें
तमाम
उम्र
आज
आप
एक
बात
मेरी
मान
जाइए
Ameer Minai
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चाँद
सा
मिस्रा
अकेला
है
मिरे
काग़ज़
पर
छत
पे
आ
जाओ
मिरा
शे'र
मुकम्मल
कर
दो
Bashir Badr
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हुस्न
बला
का
क़ातिल
हो
पर
आख़िर
को
बेचारा
है
इश्क़
तो
वो
क़ातिल
जिसने
अपनों
को
भी
मारा
है
ये
धोखे
देता
आया
है
दिल
को
भी
दुनिया
को
भी
इसके
छल
ने
खार
किया
है
सहरा
में
लैला
को
भी
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Jaun Elia
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पहले
हम
बोला
करते
थे
अब
बस
हम
भी
यूँँ
मरते
हैं
Raunak Karn
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कभी
तुम
साथ
में
मेरे
रहे
तो
थे
वही
सब
सोच
कर
तुमको
भुलाना
है
यहाँ
जो
लोग
कब
से
रो
रहे
थे
वो
वही
बोले
हमें
अब
मुस्कुराना
है
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Raunak Karn
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कभी
फिर
से
वही
बचपन
लहर
धुन
का
ज़माना
आए
बिना
तकलीफ़
के
मौसम
ख़ुशी
का
फिर
ख़ज़ाना
आए
Raunak Karn
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ये
रौशनी
ज़रा
कम
कर
दे
ये
बाग़
को
ज़रा
नम
कर
दे
Raunak Karn
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ज़माना
देख
लेगा
कौन
हैं
हम
वक़्त
आने
पर
अभी
ख़ुद
को
जलाऍंगे
अभी
ख़ुद
को
तपाऍंगे
अभी
तो
जा
रहे
हैं
डूब
करके
मात
खाने
को
मगर
इक
रोज़
रौनक़
बनके
हम
भी
लौट
आऍंगे
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Raunak Karn
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