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Raunak Karn
kabhi phir se vahii bachpan lehar dhun ka zamaana aa.e
kabhi phir se vahii bachpan lehar dhun ka zamaana aa.e | कभी फिर से वही बचपन लहर धुन का ज़माना आए
- Raunak Karn
कभी
फिर
से
वही
बचपन
लहर
धुन
का
ज़माना
आए
बिना
तकलीफ़
के
मौसम
ख़ुशी
का
फिर
ख़ज़ाना
आए
- Raunak Karn
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बहुत
बेकार
मौसम
है
मगर
कुछ
काम
करना
है
कि
ताज़ा
ज़ख़्म
मिलने
तक
पुराना
ज़ख़्म
भरना
है
Abbas Tabish
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बदले
मौसम
हालात
यहाँ
है
ख़ुशियों
की
बारात
यहाँ
होली
खेलेंगे
हम
भी
पर
खेलेंगे
तेरे
साथ
यहाँ
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Kaviraj " Madhukar"
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ख़ुद
बुलाओ
के
वो
यूँँ
घर
से
नहीं
निकलेगा
यहाँ
इनाम
मुक़द्दर
से
नहीं
निकलेगा
ऐसे
मौसम
में
बिना
काम
के
आया
हुआ
शख़्स
इतनी
जल्दी
तेरे
दफ़्तर
से
नहीं
निकलेगा
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Khurram Afaq
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ग़ुंचा
ओ
गुल
माह
ओ
अंजुम
सब
के
सब
बेकार
थे
आप
क्या
आए
कि
फिर
मौसम
सुहाना
आ
गया
Asad Bhopali
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हमारा
काम
तो
मौसम
का
ध्यान
करना
है
और
उस
के
बाद
के
सब
काम
शश-जहात
के
हैं
Pallav Mishra
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मैं
आख़िर
कौन
सा
मौसम
तुम्हारे
नाम
कर
देता
यहाँ
हर
एक
मौसम
को
गुज़र
जाने
की
जल्दी
थी
Rahat Indori
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ख़िलाफ़-ए-शर्त-ए-अना
था
वो
ख़्वाब
में
भी
मिले
मैं
नींद
नींद
को
तरसा
मगर
नहीं
सोया
ख़िलाफ़-ए-मौसम-ए-दिल
था
कि
थम
गई
बारिश
ख़िलाफ़-ए-ग़ुर्बत-ए-ग़म
है
कि
मैं
नहीं
रोया
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Khalil Ur Rehman Qamar
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मैं
कुछ
दिन
से
अचानक
फिर
अकेला
पड़
गया
हूँ
नए
मौसम
में
इक
वहशत
पुरानी
काटती
है
Liaqat Jafri
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तू
किसी
और
ही
दुनिया
में
मिली
थी
मुझ
सेे
तू
किसी
और
ही
मौसम
की
महक
लाई
थी
डर
रहा
था
कि
कहीं
ज़ख़्म
न
भर
जाएँ
मेरे
और
तू
मुट्ठियाँ
भर-भर
के
नमक
लाई
थी
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Tehzeeb Hafi
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तुम्हारे
शहर
का
मौसम
बड़ा
सुहाना
लगे
मैं
एक
शाम
चुरा
लूँ
अगर
बुरा
न
लगे
Qaisar-ul-Jafri
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अरे!
इस
शा'इरी
का
'
श
',
हमें
आता
नहीं
ये
भी
यहाँ
मिसरे
ग़ज़ल
की
बात
हम
सोचें
भला
कैसे
Raunak Karn
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मिरे
वो
ख़्वाब
में
आकर
कभी
जो
गीत
गाती
है
सुना
कर
दर्द
के
गाने
मुझे
भी
वो
रुलाती
है
Raunak Karn
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न
ही
राजा
न
ही
राही
न
ही
फ़रहाद
होना
तुम
जगह
दिल
में
बनानी
है
अरे
उस्ताद
होना
तुम
Raunak Karn
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हमारी
बात
से
सब
बस
ख़फ़ा
होते
सही
में
अब
हमारा
दिल
कहे
अब
बस
यहाँ
कोई
दिवाना
हो
हटे
बादल
यहाँ
से
और
फिर
से
यार
वो
मौसम
अरे
झंकार
दर्दों
का
कसक
फिर
से
सुहाना
हो
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Raunak Karn
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सभी
से
जो
मुझे
मिलता
रहा
बस
यार
धोखा
था
मगर
फिर
भी
कभी
हमने
किसी
को
भी
न
टोका
था
Raunak Karn
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