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sahil
shajar sab kat chuke hain ab vafaa ke the bache jitne
shajar sab kat chuke hain ab vafaa ke the bache jitne | शजर सब कट चुके हैं अब वफ़ा के थे बचे जितने
- sahil
शजर
सब
कट
चुके
हैं
अब
वफ़ा
के
थे
बचे
जितने
जफ़ा
की
धूप
में
जलना
ही
अब
अपना
मुक़द्दर
है
- sahil
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निगल
ही
चुका
था
जफ़ा
का
निवाला
अना
फिर
तमाशा
नया
कर
रही
है
Amaan Pathan
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सर
पर
हवा-ए-ज़ुल्म
चले
सौ
जतन
के
साथ
अपनी
कुलाह
कज
है
उसी
बाँकपन
के
साथ
Majrooh Sultanpuri
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जो
अंजान
थे
वो
मेरे
यार
निकले
मगर
जो
भी
अपने
थे
बेकार
निकले
ज़मीं
खा
गई
उन
वफ़ाओं
को
आख़िर
सितम
ये
हुआ
हम
गुनहगार
निकले
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Hameed Sarwar Bahraichi
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जाने
क्या
क्या
ज़ुल्म
परिंदे
देख
के
आते
हैं
शाम
ढले
पेड़ों
पर
मर्सिया-ख़्वानी
होती
है
Afzal Khan
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पूरी
कायनात
में
एक
क़ातिल
बीमारी
की
हवा
हो
गई
वक़्त
ने
कैसा
सितम
ढाया
कि
दूरियाँ
ही
दवा
हो
गईं
Unknown
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टक
गोर-ए-ग़रीबाँ
की
कर
सैर
कि
दुनिया
में
उन
ज़ुल्म-रसीदों
पर
क्या
क्या
न
हुआ
होगा
Meer Taqi Meer
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डाली
है
ख़ुद
पे
ज़ुल्म
की
यूँँ
इक
मिसाल
और
उसके
बग़ैर
काट
दिया
एक
साल
और
Subhan Asad
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सुख़न
का
जोश
कम
होता
नहीं
है
वगरना
क्या
सितम
होता
नहीं
है
भले
तुम
काट
दो
बाज़ू
हमारे
क़लम
का
सर
क़लम
होता
नहीं
है
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Baghi Vikas
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यूँँ
ही
हमेशा
उलझती
रही
है
ज़ुल्म
से
ख़ल्क़
न
उनकी
रस्म
नई
है,
न
अपनी
रीत
नई
यूँँ
ही
हमेशा
खिलाए
हैं
हमने
आग
में
फूल
न
उनकी
हार
नई
है,
न
अपनी
जीत
नई
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Faiz Ahmad Faiz
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क्या
सितम
है
कि
अब
तिरी
सूरत
ग़ौर
करने
पे
याद
आती
है
Jaun Elia
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वफ़ा
की
गर
सज़ा
है
ये
सज़ा
पूरी
तो
दे
कर
जा
अभी
तो
दिल
ही
टूटा
है
अभी
धड़कन
तो
जारी
है
sahil
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है
करता
लहू
को
इधर
से
उधर
ये
तेरे
बाद
दिल
का
यही
काम
है
बस
sahil
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इशारा
है
सियासत
पर
अभी
बातें
नहीं
करनी
अगर
हम
भी
रहे
ख़ामोश
तो
क्या
मुल्क
का
होगा
sahil
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मिरे
यार
आए
नमक
ले
के
मिलने
उन्हें
है
पता
ज़ख़्म
मेरा
हरा
है
sahil
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हाल
सब
पूछते
हैं
यार
ये
तो
रस्में
हैं
तुम
भी
पागल
ही
हो
सच
मुच
में
लगे
बतलाने
sahil
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