hijr ke din kuchh aise guzaar rahe hain | हिज्र के दिन कुछ ऐसे गुजार रहे हैं

  - Rajnish
हिज्रकेदिनकुछऐसेगुजाररहेहैं
जैसेकोईखानदानीकर्ज़उताररहेहैं
हमेंसंवारनीथीअपनीबिगड़ीकिस्मत
औरहमहैंकितेरेजुल्फसंवाररहेहैं
तेरेइश्क़मेंगयाग़ज़बकाहुनरहाथोंमें
अबतलकजोभीकियाहैउस
मेंबेकाररहेहैं
इतनासोचमतकियेसौदाबड़ेनफेकाहै
मुझकोचूमनेवालेहोंठहमेशागुलज़ाररहेहैं
करलेतफ़्तीशठीकसेमेरेगुजरेदिनोंकी
इल्ज़ाम-ए-ज़फामेंहमसालोंतकफराररहेहैं
धीरे-धीरेधुंधलीहोतीजायेगीआवाज़मेरी
गुजरतीट्रेनसेतुझकोपुकाररहेहैं
  - Rajnish
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