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Ankit Raj
kisi ne dil ke andar hai chhipaai
kisi ne dil ke andar hai chhipaai | किसी ने दिल के अंदर है छिपाई
- Ankit Raj
किसी
ने
दिल
के
अंदर
है
छिपाई
किसी
ने
चेहरे
पे
रक्खी
उदासी
- Ankit Raj
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देखिए
होगा
श्री-कृष्ण
का
दर्शन
क्यूँँ-कर
सीना-ए-तंग
में
दिल
गोपियों
का
है
बेकल
Mohsin Kakorvi
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दिल
में
और
दुनिया
में
अब
नहीं
मिलेंगे
हम
वक़्त
के
हमेशा
में
अब
नहीं
मिलेंगे
हम
Jaun Elia
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तुम्हारे
ख़त
को
जलने
में
ज़रा
सा
वक़्त
बाकी
है
ये
दिल
बाहर
निकलने
में
ज़रा
सा
वक़्त
बाकी
है
तुम्हारा
फ़ैसला
है
पास
रुकना
या
नहीं
रुकना
मेरी
क़िस्मत
बदलने
में
ज़रा
सा
वक़्त
बाकी
है
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Tanoj Dadhich
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हम
मिल
के
आ
गए
मगर
अच्छा
नहीं
लगा
फिर
यूँँ
हुआ
असर
कि
घर
अच्छा
नहीं
लगा
इक
बार
दिल
में
तुझ
सेे
जुदाई
का
डर
बना
फिर
दूसरा
कोई
भी
डर
अच्छा
नहीं
लगा
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Shriyansh Qaabiz
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दिल
को
तेरी
चाहत
पे
भरोसा
भी
बहुत
है
और
तुझ
से
बिछड़
जाने
का
डर
भी
नहीं
जाता
Ahmad Faraz
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तुम्हें
हम
भी
सताने
पर
उतर
आएँ
तो
क्या
होगा
तुम्हारा
दिल
दुखाने
पर
उतर
आएँ
तो
क्या
होगा
हमें
बदनाम
करते
फिर
रहे
हो
अपनी
महफ़िल
में
अगर
हम
सच
बताने
पर
उतर
आएँ
तो
क्या
होगा
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Santosh S Singh
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न
तेरे
आने
से
मेरा
शबाब
लौटा
है
न
दिल
लगाने
से
मेरा
शबाब
लौटा
है
क़सम
ख़ुदा
की
बताता
हूँ
राज़
ये
तुमको
नहारी
खाने
से
मेरा
शबाब
लौटा
है
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Paplu Lucknawi
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कैसा
दिल
और
इस
के
क्या
ग़म
जी
यूँँ
ही
बातें
बनाते
हैं
हम
जी
Jaun Elia
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शाम-ए-फ़िराक़
अब
न
पूछ
आई
और
आ
के
टल
गई
दिल
था
कि
फिर
बहल
गया
जाँ
थी
कि
फिर
सँभल
गई
Faiz Ahmad Faiz
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हर
दुख
का
है
इलाज,
उसे
देखते
रहो
सबकुछ
भुला
के
आज
उसे
देखते
रहो
देखा
उसे
तो
दिल
ने
ये
बे-साख़्ता
कहा
छोड़ो
ये
काम
काज
उसे
देखते
रहो
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Aslam Rashid
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देखना
पत्थर
में
इक
दिन
प्यार
से
ये
नदी
रस्ता
बनाती
जाएगी
Ankit Raj
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हमारे
हाथ
में
तस्वीर
इक
पुरानी
थी
हमारी
आँख
में
गुज़रा
हुआ
ज़माना
था
Ankit Raj
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पूछती
है
उदासी
लिपट
के
मुझे
मैं
तेरी
कौन
हूँ
तू
मिरा
कौन
है
Ankit Raj
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पास
मेरे
ये
हुनर
है
ही
नहीं
शहर
में
मेरा
गुज़र
है
ही
नहीं
उस
सेे
पूछो
तुम
जहाँ
के
सारे
दुख
उसका
कोई
हम-सफ़र
है
ही
नहीं
क्या
दुआएँ
काम
आएँगी
मुझे
कुछ
दवाओं
का
असर
है
ही
नहीं
छोड़
जाना
है
जहाँ
मैंने
अभी
इस
जहाँ
में
तू
अगर
है
ही
नहीं
जीत
सकता
ही
नहीं
कोई
इसे
दिल
के
रस्ते
में
जिगर
है
ही
नहीं
काट
पाएगा
कोई
कैसे
भला
कंधे
पे
मेरे
तो
सर
है
ही
नहीं
जिसके
साए
में
बिता
दी
उम्र
राज़
आज
जाना
वो
शजर
है
ही
नहीं
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Ankit Raj
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लिखेंगे
ग़लतियाँ
अपनी
कभी
और
फिर
बनाकर
नाव
दरिया
में
बहाएंगे
Ankit Raj
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