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Ankit Raj
dekhna patthar men ik din pyaar se
dekhna patthar men ik din pyaar se | देखना पत्थर में इक दिन प्यार से
- Ankit Raj
देखना
पत्थर
में
इक
दिन
प्यार
से
ये
नदी
रस्ता
बनाती
जाएगी
- Ankit Raj
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हमेशा
हाथों
में
होते
हैं
फूल
उनके
लिए
किसी
को
भेज
के
मँगवाने
थोड़ी
होते
हैं
Anwar Shaoor
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सभी
रिश्तें
मैं
यूँँ
बचाए
हूँ
जैसे
तड़पते
दियों
को
हवा
देते
रहना
Parul Singh "Noor"
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देख
ज़िंदाँ
से
परे
रंग-ए-चमन
जोश-ए-बहार
रक़्स
करना
है
तो
फिर
पाँव
की
ज़ंजीर
न
देख
Majrooh Sultanpuri
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हाथ
काँटों
से
कर
लिए
ज़ख़्मी
फूल
बालों
में
इक
सजाने
को
Ada Jafarey
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फूल
ही
फूल
याद
आते
हैं
आप
जब
जब
भी
मुस्कुराते
हैं
Sajid Premi
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साथ
चलते
जा
रहे
हैं
पास
आ
सकते
नहीं
इक
नदी
के
दो
किनारों
को
मिला
सकते
नहीं
उसकी
भी
मजबूरियाँ
हैं
मेरी
भी
मजबूरियाँ
रोज़
मिलते
हैं
मगर
घर
में
बता
सकते
नहीं
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Bashir Badr
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बहरस
ख़ारिज
हूँ
ये
मालूम
है
पर
तुम्हारी
ही
ग़ज़ल
का
शे'र
हूँ
Gyan Prakash Akul
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कोई
समुंदर,
कोई
नदी
होती
कोई
दरिया
होता
हम
जितने
प्यासे
थे
हमारा
एक
गिलास
से
क्या
होता
ताने
देने
से
और
हम
पे
शक
करने
से
बेहतर
था
गले
लगा
के
तुमने
हिजरत
का
दुख
बाट
लिया
होता
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Tehzeeb Hafi
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नदी
को
कोसते
हैं
सब
किसी
के
डूब
जाने
पर
नदी
में
डूबते
को
पर
कोई
तिनका
नहीं
देता
Alankrat Srivastava
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चल
दिए
घर
से
तो
घर
नहीं
देखा
करते
जाने
वाले
कभी
मुड़
कर
नहीं
देखा
करते
सीपियाँ
कौन
किनारे
से
उठा
कर
भागा
ऐसी
बाते
समुंदर
नहीं
देखा
करते
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Unknown
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पूछती
है
उदासी
लिपट
के
मुझे
मैं
तेरी
कौन
हूँ
तू
मिरा
कौन
है
Ankit Raj
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दिल
सभी
के
यहाँ
कुचलते
हुए
हम
ने
देखा
है
उस
को
चलते
हुए
कितनी
हसरत
से
मुझ
को
तकता
है
रात
भर
इक
चराग़
जलते
हुए
उस
ने
नज़रों
को
मेरी
देख
लिया
अपने
रुख़्सार
पर
टहलते
हुए
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Ankit Raj
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तुम
ने
इस
बात
का
पता
नहीं
है
इश्क़
का
कोई
दायरा
नहीं
है
दो
किनारे
हैं
इस
नदी
के
हम
और
किनारों
में
फ़ासला
नहीं
है
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Ankit Raj
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आँख
से
जब
तुम्हारी
उतारे
गए
जाँ
बचानी
पड़ी,
जिस्म
हारे
गए
हिज्र
में
तो
तुम्हारे
यही
बस
हुआ
रात
काटी
गई
,
दिन
गुज़ारे
गए
इश्क़
का
भूत
चढ़ने
लगा
था
हमें
एक
इक
कर
के
हम
यार
सारे
गए
चाँद
पीछे
तुम्हारे
था
पहले
गया
धीरे
धीरे
से
फिर
ये
सितारे
गए
तितलियों
को
बुलाया
गया
और
फिर
रंग
फूलों
से
तेरे
निखारे
गए
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Ankit Raj
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बात
दोनों
की
होती
रही
सुब्ह
तक
चाँद
भी
जगमगाता
रहा
रात
भर
Ankit Raj
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