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Ankit Raj
paas mere ye hunar hai hi nahin
paas mere ye hunar hai hi nahin | पास मेरे ये हुनर है ही नहीं
- Ankit Raj
पास
मेरे
ये
हुनर
है
ही
नहीं
शहर
में
मेरा
गुज़र
है
ही
नहीं
उस
सेे
पूछो
तुम
जहाँ
के
सारे
दुख
उसका
कोई
हम-सफ़र
है
ही
नहीं
क्या
दुआएँ
काम
आएँगी
मुझे
कुछ
दवाओं
का
असर
है
ही
नहीं
छोड़
जाना
है
जहाँ
मैंने
अभी
इस
जहाँ
में
तू
अगर
है
ही
नहीं
जीत
सकता
ही
नहीं
कोई
इसे
दिल
के
रस्ते
में
जिगर
है
ही
नहीं
काट
पाएगा
कोई
कैसे
भला
कंधे
पे
मेरे
तो
सर
है
ही
नहीं
जिसके
साए
में
बिता
दी
उम्र
राज़
आज
जाना
वो
शजर
है
ही
नहीं
- Ankit Raj
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उधारी
सर
से
ऊपर
बढ़
चुकी
है
हमारी
जान
जोखिम
में
पड़ी
है
हमीं
अपमान
सहकर
जी
रहे
हैं
अना
की
लाश
पंखे
पर
मिली
है
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Vikas Sahaj
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गर
अदीबों
को
अना
का
रोग
लग
जाए
तो
फिर
गुल
मोहब्बत
के
अदब
की
शाख़
पर
खिलते
नहीं
Afzal Ali Afzal
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दिन
रात
मय-कदे
में
गुज़रती
थी
ज़िंदगी
'अख़्तर'
वो
बे-ख़ुदी
के
ज़माने
किधर
गए
Akhtar Shirani
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मोहब्बत
नेक-ओ-बद
को
सोचने
दे
ग़ैर-मुमकिन
है
बढ़ी
जब
बे-ख़ुदी
फिर
कौन
डरता
है
गुनाहों
से
Arzoo Lakhnavi
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ये
नदी
वर्ना
तो
कब
की
पार
थी
मेरे
रस्ते
में
अना
दीवार
थी
आप
को
क्या
इल्म
है
इस
बात
का
ज़िंदगी
मुश्किल
नहीं
दुश्वार
थी
थीं
कमानें
दुश्मनों
के
हाथ
में
और
मेरे
हाथ
में
तलवार
थी
जल
गए
इक
रोज़
सूरज
से
चराग़
रौशनी
को
रौशनी
दरकार
थी
आज
दुनिया
के
लबों
पर
मुहर
है
कल
तलक
हाँ
साहब-ए-गुफ़्तार
थी
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ARahman Ansari
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अब
तो
उस
सूने
माथे
पर
कोरेपन
की
चादर
है
अम्मा
जी
की
सारी
सजधज,
सब
ज़ेवर
थे
बाबूजी
कभी
बड़ा
सा
हाथ
ख़र्च
थे
कभी
हथेली
की
सूजन
मेरे
मन
का
आधा
साहस,
आधा
डर
थे
बाबूजी
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Aalok Shrivastav
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चल
गया
होगा
पता
ये
आपको
बे-वफ़ा
कहते
हैं
लड़के
आपको
इक
ज़रा
से
हुस्न
पर
इतनी
अकड़
तू
समझती
क्या
है
अपने
आपको
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Kushal Dauneria
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लोग
हम
सेे
सीखते
हैं
ग़म
छुपाने
का
हुनर
आओ
तुमको
भी
सिखा
दें
मुस्कुराने
का
हुनर
क्या
ग़ज़ब
है
तजरबे
की
भेंट
तुम
ही
चढ़
गए
तुम
से
ही
सीखा
था
हमने
दिल
दुखाने
का
हुनर
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Kashif Sayyed
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ख़ुदी
को
कर
बुलंद
इतना
कि
हर
तक़दीर
से
पहले
ख़ुदा
बंदे
से
ख़ुद
पूछे
बता
तेरी
रज़ा
क्या
है
Allama Iqbal
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तू
मोहब्बत
नहीं
समझती
है
हम
भी
अपनी
अना
में
जलते
हैं
इस
दफा
बंदिशें
ज़ियादा
हैं
छोड़
अगले
जनम
में
मिलते
हैं
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Ritesh Rajwada
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उतरना
इश्क़
की
गहराइयों
में
डरते
हुए
किसी
को
देखा
नहीं
डूब
के
उभरते
हुए
Ankit Raj
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वो
मुझ
सेे
आगे
बढ़ता
ही
गया
औ'र
मैं
उसकी
याद
में
बैठा
हुआ
था
Ankit Raj
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वही
खिड़की
वही
रस्ता
हमारा
बहुत
मशहूर
था
कि़स्सा
हमारा
गुज़रते
हैं
गली
से
तेरी
अब
भी
बदलता
ही
नहीं
रस्ता
हमारा
उसी
को
हम
चलो
मज़बूत
कर
लें
बचा
जैसा
भी
है
रिश्ता
हमारा
हमें
ये
डर
सताये
जा
रहा
है
तुम्हारे
बाद
क्या
होगा
हमारा
तुम्हारे
हाथ
फूलों
से
भरें
हैं
किताबों
से
भरा
बस्ता
हमारा
कभी
हम
भी
किसी
को
याद
आते
कोई
तो
रास्ता
तकता
हमारा
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Ankit Raj
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पिंजरे
की
हो
गई
आदत
उसे
है
अब
परिंदे
को
हवा
का
मसअला
है
Ankit Raj
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एक
दो
पल
तो
ज़रा
तुम
और
रुक
जाओ
ना
ऐसी
भी
जल्दी
भला
क्या
है
चले
जाना
तुम
Ankit Raj
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