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Qambar Naqvi
ana ko apni kabhi bhi daga nahin dooñga
ana ko apni kabhi bhi daga nahin dooñga | अना को अपनी कभी भी दगा नहीं दूँगा
- Qambar Naqvi
अना
को
अपनी
कभी
भी
दगा
नहीं
दूँगा
मैं
डूब
जाऊँगा,
तुझको
सदा
नहीं
दूँगा
- Qambar Naqvi
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दर्द
सहने
का
हुनर
तो
पास
सबके
है
मगर
दर्द
कहने
का
हुनर
बस
शायरों
के
पास
है
Divy Kamaldhwaj
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ख़ुद
को
मनवाने
का
मुझको
भी
हुनर
आता
है
मैं
वो
कतरा
हूँ
समुंदर
मेरे
घर
आता
है
Waseem Barelvi
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अब
तो
उस
सूने
माथे
पर
कोरेपन
की
चादर
है
अम्मा
जी
की
सारी
सजधज,
सब
ज़ेवर
थे
बाबूजी
कभी
बड़ा
सा
हाथ
ख़र्च
थे
कभी
हथेली
की
सूजन
मेरे
मन
का
आधा
साहस,
आधा
डर
थे
बाबूजी
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Aalok Shrivastav
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निगल
ही
चुका
था
जफ़ा
का
निवाला
अना
फिर
तमाशा
नया
कर
रही
है
Amaan Pathan
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ये
हुनर
जो
आ
जाए,
आपका
ज़माना
है
पाँव
किसके
छूने
हैं,
सर
कहाँ
झुकाना
है
Astitwa Ankur
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अना
को
अपनी
समझाना
पड़ेगा
बुलाती
है,
तो
फिर
जाना
पड़ेगा
Salman Zafar
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अब
दुआएँ
पा
रहा
है
हर
दिल-ए-नाशाद
की
क्या
ग़ज़ब
होगा
वो
जिसने
ख़ुद-कुशी
ईजाद
की
शा'इरी
का
ये
हुनर
कुछ
देर
से
आया
मगर
जी-हुज़ूरी
की
नहीं
मैंने
किसी
उस्ताद
की
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Rituraj kumar
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अगर
पलक
पे
है
मोती
तो
ये
नहीं
काफ़ी
हुनर
भी
चाहिए
अल्फ़ाज़
में
पिरोने
का
Javed Akhtar
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ये
नदी
वर्ना
तो
कब
की
पार
थी
मेरे
रस्ते
में
अना
दीवार
थी
आप
को
क्या
इल्म
है
इस
बात
का
ज़िंदगी
मुश्किल
नहीं
दुश्वार
थी
थीं
कमानें
दुश्मनों
के
हाथ
में
और
मेरे
हाथ
में
तलवार
थी
जल
गए
इक
रोज़
सूरज
से
चराग़
रौशनी
को
रौशनी
दरकार
थी
आज
दुनिया
के
लबों
पर
मुहर
है
कल
तलक
हाँ
साहब-ए-गुफ़्तार
थी
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ARahman Ansari
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दिन
रात
मय-कदे
में
गुज़रती
थी
ज़िंदगी
'अख़्तर'
वो
बे-ख़ुदी
के
ज़माने
किधर
गए
Akhtar Shirani
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ज़िन्दगी
ख़त्म
होने
वाली
है
ऐसा
लगता
है
कुछ
अधूरा
है
Qambar Naqvi
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निकालूँ
कैसे
मैं
दो
दिन
की
ज़िन्दगी
में
वक़्त
पचास
काम
मिरे
एक
दिन
में
रहते
हैं
Qambar Naqvi
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वक़्त
जब
ख़ास
कोई
आता
है
तब
मिलता
है
यह
ज़माना
है
ज़रूरत
के
सबब
मिलता
है
Qambar Naqvi
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बज़ाहिर
कौन-सा
रिश्ता
नहीं
है
हक़ीक़त
में
कोई
अपना
नहीं
है
हमारी
ख़ैरियत
क्यूँ
पूछते
हो
तुम्हें
मालूम
आख़िर
क्या
नहीं
है
ज़रूरत
से
तो
सब
मिलते
हैं
अपनी
हमें
तुम
से
कोई
शिकवा
नहीं
है
ज़माना
क्या,
न
अपने
होंगे
अपने
तुम्हारे
पास
गर
पैसा
नहीं
है
हमें
'क़म्बर'
वही
अच्छा
लगे
है
जिसे
नज़दीक
से
देखा
नहीं
है
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Qambar Naqvi
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जब
हक़ीक़त
में
तुम्हें
इरफ़ाने-ग़म
हो
जाएगा
जिस
क़दर
टूटेगा
यह
दिल
मोहतरम
हो
जाएगा
Qambar Naqvi
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