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Prit
poore hosh-o-hawas men hooñ aur
poore hosh-o-hawas men hooñ aur | पूरे होश-ओ-हवा से में हूँ और
- Prit
पूरे
होश-ओ-हवा
से
में
हूँ
और
इक
अजब
क़ैफियत
भी
तारी
है
ऐ
कज़ा
ज़िंदा
छोड़ना
उनको
जिनको
जीने
में
मौत
आ
रही
है
- Prit
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तुम्हारी
मौत
मेरी
ज़िंदगी
से
बेहतर
है
तुम
एक
बार
मरे
मैं
तो
बार
बार
मरा
Zubair Ali Tabish
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अचानक
छूट
जाती
है
रियासत
अचानक
मौत
आती
है
सभी
को
Meem Alif Shaz
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मौत
ने
सारी
रात
हमारी
नब्ज़
टटोली
ऐसा
मरने
का
माहौल
बनाया
हमने
घर
से
निकले
चौक
गए
फिर
पार्क
में
बैठे
तन्हाई
को
जगह-जगह
बिखराया
हमने
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Shariq Kaifi
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जहाँ
तक
भाग
पाओ
मौत
हम
सेे
भाग
लो
लेकिन
हमारा
वा'दा
है
इक
दिन
तुम्हें
अपना
करेंगे
हम
Gautam Raj 'Dheeraj'
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जब
से
छेड़ा
है
मेरे
ज़ख़्मों
को
आ
रही
मौत
की
सदा
मुझको
Rachit Sonkar
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ये
भी
अच्छा
हुआ
मौत
ने
आकर
हमको
बचा
लिया
वरना
हालत
ऐसी
थी,
हम
शायर
भी
हो
सकते
थे
Bhaskar Shukla
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दुनिया
मेरी
बला
जाने
महँगी
है
या
सस्ती
है
मौत
मिले
तो
मुफ़्त
न
लूँ
हस्ती
की
क्या
हस्ती
है
Fani Badayuni
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इक
प्यासे
की
मौत
हुई
है
अब
पानी
को
दुख
होगा
Shadab Javed
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दो
गज़
सही
मगर
ये
मेरी
मिल्कियत
तो
है
ऐ
मौत
तूने
मुझे
ज़मींदार
कर
दिया
Rahat Indori
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बरस
रही
है
आँखें
हैं
ये
इनको
बादल
मत
कहना
मौत
हुई
है
दिल
की
मेरे
उसको
घाइल
मत
कहना
जीवन
भर
वो
साथ
रहेगा
प्यार
करेगा
बस
तुमको
मुझको
पागल
कह
देती
थी
उसको
पागल
मत
कहना
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Tanoj Dadhich
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जिसको
ख़ुद
की
ख़बर
नहीं
रहती
वो
तेरी
फ़िक्र
करता
रहता
है
Prit
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इक
उम्र
लगी
ये
बात
समझने
में
हमको
ज़्यादा
अच्छा
होना
भी
अच्छा
नहीं
होता
Prit
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इश्क़
क्या
कम
है
कर्बला
से
'प्रीत'
झुकते
ही
सिर
यहाँ
भी
कटता
है
Prit
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मेरे
अपने
हर
इक
पल
मेरा
दिल
नाशाद
करते
थे
मुझे
बर्बाद
कर
के
कहते
थे
आबाद
करते
थे
सो
मेरे
मसअलों
ने
ज़िंदगी
को
मौत
कर
डाला
जो
मुझको
जानते
थे
लाश
कह
कर
याद
करते
थे
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Prit
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अहद-ओ-पैमाँ
निभाता
पागल
था
आदमी
पहले
कितना
पागल
था
एक
झूठे
ने
ख़ुद-कुशी
कर
ली
कह
न
पाया
ज़माना
पागल
था
सारी
ही
दुनिया
ने
हवस
को
चुना
एक
मैं
ही
अकेला
पागल
था
यहाँ
सब
जौन
के
दिवाने
हैं
जौन
भी
अच्छा
ख़ासा
पागल
था
प्यार
में
तेरे
क्या
ख़बर
तुझको
इक
समझदार
कितना
पागल
था
जहाँ
नफ़रत
के
चरखे
चलते
वहाँ
प्रीत
बुनकर
तू
बनता
पागल
था
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Prit
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