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Prit
labon se jiska maatha chooma tha hamne
labon se jiska maatha chooma tha hamne | लबों से जिसका माथा चूमा था हमने
- Prit
लबों
से
जिसका
माथा
चूमा
था
हमने
उसे
सिगरेट
पी-पी
कर
भूले
जाते
हैं
- Prit
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दो
नन्हीं
कलियों
ने
रोक
लिया
वरना
तितली
ने
तो
आज
धतूरा
खाना
था
Shruti chhaya
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चश्म
हो
तो
आईना-ख़ाना
है
दहर
मुँह
नज़र
आता
है
दीवारों
के
बीच
Meer Taqi Meer
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वो
हमारा
ग़म
चुरा
कर
ले
गया
साथ
अपने
ले
गया
तस्वीर
भी
Meem Alif Shaz
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शहर
गुम-सुम
रास्ते
सुनसान
घर
ख़ामोश
हैं
क्या
बला
उतरी
है
क्यूँँ
दीवार-ओ-दर
ख़ामोश
हैं
Azhar Naqvi
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बड़े
ताबाँ
बड़े
रौशन
सितारे
टूट
जाते
हैं
सहर
की
राह
तकना
ता
सहर
आसाँ
नहीं
होता
Ada Jafarey
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सरफ़रोशी
की
तमन्ना
अब
हमारे
दिल
में
है
देखना
है
ज़ोर
कितना
बाज़ू-ए-क़ातिल
में
है
Bismil Azimabadi
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बेनतीजा
रह
गईं
दिल्ली
में
सारी
बैठकें
अन्नदाता
खेत
की
मेड़ों
पे
भूखे
मर
गए
Siraj Faisal Khan
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आधी
रात
की
चुप
में
किस
की
चाप
उभरती
है
छत
पे
कौन
आता
है
सीढ़ियाँ
नहीं
खुलतीं
Parveen Shakir
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तिरी
तस्वीर
तो
वा'दे
के
दिन
खिंचने
के
क़ाबिल
है
कि
शर्माई
हुई
आँखें
हैं
घबराया
हुआ
दिल
है
Nazeer Allahabadi
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तेरी
तारीफ़
करने
लग
गए
हैं
तेरे
दुश्मन
हमारे
शे'र
सुनके
Tanoj Dadhich
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टूटने
को
है
सच्चा
इश्क़
अपना
जोड़े
रखने
को
झूठी
बातें
कर
Prit
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फ़ुलाँ
औरत
किसी
के
इश्क़
में
पागल
हुई
कभी
तुमने
सुना
क्या
क्योंकि
ये
मुमकिन
नहीं
Prit
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वो
कभी
मेरे
गले
आ
मिलता
सहरा
में
प्यासे
को
दरिया
मिलता
वो
मेरा
हाथ
पकड़
के
चलता
भटके
नाविक
को
किनारा
मिलता
इश्क़
में
दर्द
मिले
सिर्फ़
और
सिर्फ़
और
कुछ
मिलता
भी
तो
क्या
मिलता
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Prit
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अहद-ओ-पैमाँ
निभाता
पागल
था
आदमी
पहले
कितना
पागल
था
एक
झूठे
ने
ख़ुद-कुशी
कर
ली
कह
न
पाया
ज़माना
पागल
था
सारी
ही
दुनिया
ने
हवस
को
चुना
एक
मैं
ही
अकेला
पागल
था
यहाँ
सब
जौन
के
दिवाने
हैं
जौन
भी
अच्छा
ख़ासा
पागल
था
प्यार
में
तेरे
क्या
ख़बर
तुझको
इक
समझदार
कितना
पागल
था
जहाँ
नफ़रत
के
चरखे
चलते
वहाँ
प्रीत
बुनकर
तू
बनता
पागल
था
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Prit
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इसलिए
भी
मैं
देर
से
पहुँचा
लौट
कर
जल्दी
जाना
था
मुझको
Prit
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