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Prit
ginti ke chaar din hayaat ke hain
ginti ke chaar din hayaat ke hain | गिनती के चार दिन हयात के हैं
- Prit
गिनती
के
चार
दिन
हयात
के
हैं
बाक़ी
जितने
बचे
वफ़ात
के
हैं
आपकी
माने
भी
तो
हम
क्यूँँकर
आप
साहिब
कब
अपनी
बात
के
हैं
नाम
मेरा
लिखा
हुआ
है
पर
रंग
मेहँदी
में
और
हाथ
के
हैं
ये
जो
बिस्तर
पे
लाश
हो
रखे
हैं
ये
सभी
गुल
सुहागरात
के
हैं
वो
भले
हैं
तो
होंगे
मुझको
क्या
ये
बुरे
हैं
प
मेरी
ज़ात
के
हैं
- Prit
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दर
से
तेरे
जो
निकले
हम,
फिर
भटके
कूचे
कूचे
में
फिर
दर-ब-दर
हुए
सनम,
तेरी
गली
में
मर
गए
Prit
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हम
सेे
मत
पूछो
क्या
देखते
हैं
हम
दुखों
में
मज़ा
देखते
हैं
तेरी
फ़ोटो
को
हम
ज़ूम
कर
के
लब,
निगाहें,
गला
देखते
हैं
इन
निगाहों
में
क्या
देखते
हैं?
जाम
औ’
मय-कदा
देखते
हैं
रूह
औ
जिस्म
को
आप
देखो
हम
वफ़ा
में
सज़ा
देखते
हैं
दिल
लगाना
है
घाटे
का
सौदा
लोग
इस
में
नफा
देखते
हैं
आप
को
देख
जब
ख़ुद
को
देखें
हर
तरफ़
हम
ख़ुदा
देखते
हैं
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Prit
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है
दु'आ
जल्दी
जन्नत
अता
हो
तुझे
तू
मेरे
इश्क़
का
इश्क़
है
ऐ
रक़ीब
Prit
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मैंने
कांटो
से
उलझ
कर
जाना
फूलों
से
इश्क़
बड़ा
मुश्किल
है
Prit
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तेरी
यादों
के
जंगल
में
खो
जाते
हैं
सबके
आगे
हँसते
हँसते
रो
जाते
हैं
अब
उसको
बदलें
इतनी
तो
औक़ात
नहीं
वो
जैसा
है
हम
भी
वैसे
हो
जाते
हैं
दिन
भर
ख़ुद
से
तेरी
बातें
करते
करते
थक
जाते
हैं,
सो
घर
जा
कर
सो
जाते
हैं
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Prit
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