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Naresh sogarwal 'premi'
zindagi men rahe sang teeno hi ham
zindagi men rahe sang teeno hi ham | ज़िन्दगी में रहे संग तीनों ही हम
- Naresh sogarwal 'premi'
ज़िन्दगी
में
रहे
संग
तीनों
ही
हम
मैं
मिरी
ये
क़लम
और
मेरा
ये
ग़म
- Naresh sogarwal 'premi'
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जो
गुज़ारी
न
जा
सकी
हम
से
हम
ने
वो
ज़िन्दगी
गुज़ारी
है
Jaun Elia
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तल्ख़ियाँ
इस
में
बहुत
कुछ
हैं
मज़ा
कुछ
भी
नहीं
ज़िंदगी
दर्द-ए-मोहब्बत
के
सिवा
कुछ
भी
नहीं
Kaleem Aajiz
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कुछ
दिन
से
ज़िंदगी
मुझे
पहचानती
नहीं
यूँँ
देखती
है
जैसे
मुझे
जानती
नहीं
Anjum Rehbar
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तुम्हारी
मौत
मेरी
ज़िंदगी
से
बेहतर
है
तुम
एक
बार
मरे
मैं
तो
बार
बार
मरा
Zubair Ali Tabish
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ज़िंदगी
तू
ने
मुझे
क़ब्र
से
कम
दी
है
ज़मीं
पाँव
फैलाऊँ
तो
दीवार
में
सर
लगता
है
Bashir Badr
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ज़िंदगी
एक
फ़न
है
लम्हों
को
अपने
अंदाज़
से
गँवाने
का
Jaun Elia
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जान
भी
अब
दिल
पे
वारी
जाएगी
ये
बला
सर
से
उतारी
जाएगी
एक
पल
तुझ
बिन
गुज़रना
है
कठिन
ज़िन्दगी
कैसे
गुज़ारी
जाएगी
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Anjum Rehbar
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किया
बादलों
में
सफ़र
ज़िंदगी
भर
ज़मीं
पर
बनाया
न
घर
ज़िंदगी
भर
सभी
ज़िंदगी
के
मज़े
लूटते
हैं
न
आया
हमें
ये
हुनर
ज़िंदगी
भर
मोहब्बत
रही
चार
दिन
ज़िंदगी
में
रहा
चार
दिन
का
असर
ज़िंदगी
भर
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Anwar Shaoor
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जब
से
हुआ
है
कंधे
से
बस्ते
का
बोझ
कम
बढ़ते
ही
जा
रहे
हैं
मेरी
ज़िंदगी
में
ग़म
Ankit Maurya
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बता
रहा
है
झटकना
तेरी
कलाई
का
ज़रा
भी
रंज
नहीं
है
तुझे
जुदाई
का
मैं
ज़िंदगी
को
खुले
दिल
से
खर्च
करता
था
हिसाब
देना
पड़ा
मुझको
पाई-पाई
का
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Azhar Faragh
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ख़ुशी
और
ग़म
का
तो
आलम
यही
है
कि
सिगरेट
जलती
है
दोनों
समाँ
पर
Naresh sogarwal 'premi'
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लोग
क्यूँँ
सिगरेट
के
पीने
से
जाहिल
कहते
हैं
क्या
ज़रा
से
इस
धुएँ
में
ज़र्फ़
मेरा
उड़
गया
Naresh sogarwal 'premi'
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आपके
चाहने
वाले
तो
बिछड़
जाते
हैं
जल्द
प्रेमी
क्या
लज़्ज़त-ए-इश्क़-ए-बुताँ
करिएगा
आप
Naresh sogarwal 'premi'
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ज़िंदगी
की
सीख
मुफ़्त
में
कहाँ
से
लाइए
जाइए
जनाब
आप
पहले
दिल
लुटाइए
Naresh sogarwal 'premi'
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माँ
तो
हर
इक
विषयों
का
चर्चा
होता
है
घर
का
पिता
इक
एक
पुर्ज़ा
होता
है
वालिद
का
साया
घर
से
गर
उठ
जाए
तो
बहनों
को
भाई
बाप
दर्जा
होता
है
इंसान
की
मजबूरी
देखी
नइँ
तू
ने
तंगी
में
इक
पाई
पे
चर्चा
होता
है
आसाँ
नहीं
पढ़ना
बिना
पैसों
के
भी
आने
व
जाने
में
भी
ख़र्चा
होता
है
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Naresh sogarwal 'premi'
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