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Prashant Rao chourase
qaid hai tasveerein aankhoñ men meri
qaid hai tasveerein aankhoñ men meri | क़ैद है तस्वीरें आँखों में मेरी
- Prashant Rao chourase
क़ैद
है
तस्वीरें
आँखों
में
मेरी
मैं
भी
आँखों
में
किसी
के
क़ैद
हूँ
- Prashant Rao chourase
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सज़ा
सच
बोलने
की
यह
मिली
है
सभी
ने
कर
लिया
हम
से
किनारा
Meem Alif Shaz
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हसीन
लड़की
से
दिल
लगाना
भी
इक
ख़ता
है
मुझे
पता
है
अगर
सज़ा
में
मिले
क़ज़ा
तो
अलग
मज़ा
है
मुझे
पता
है
Jatin shukla
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किसी
के
साए
को
क़ैद
करने
का
एक
तरीक़ा
बता
रहा
हूँ
एक
उसके
आगे
चराग़
रख
दे,
एक
उसके
पीछे
चराग़
रख
दे
मैं
दिल
की
बातों
में
आ
गया
और
उठा
के
ले
आया
उसकी
पायल
दिमाग़
देता
रहा
सदाएँ,
चराग़
रख
दे,
चराग़
रख
दे
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Charagh Sharma
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मिलेगी
क़ैद
से
कैसे
रिहाई
कौन
सोचेगा
यहाँ
तेरे
सिवा
तेरी
भलाई
कौन
सोचेगा
ज़माने
भर
का
तू
सोचेगा
तो
फिर
तेरे
बारे
में
मुझे
तू
ही
बता
दे
मेरे
भाई,
कौन
सोचेगा?
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Siddharth Saaz
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आधी
आधी
रात
तक
सड़कों
के
चक्कर
काटिए
शा'इरी
भी
इक
सज़ा
है
ज़िंदगी
भर
काटिए
कोई
तो
हो
जिस
से
उस
ज़ालिम
की
बातें
कीजिए
चौदहवीं
का
चाँद
हो
तो
रात
छत
पर
काटिए
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Nisar Nasik
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निगाह-ए-शोख़
का
क़ैदी
नहीं
है
कौन
यहाँ
किसे
तमन्ना
नहीं
फूल
चूमने
को
मिले
Aks samastipuri
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मिरी
सुब्ह
का
यूँँ
भी
इज़हार
हो
पियाला
हो
कॉफ़ी
का
अख़बार
हो
कोई
जुर्म
साबित
न
हो
उसका
फिर
जो
तेरी
हँसी
में
गिरफ़्तार
हो
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Swapnil Tiwari
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तेरी
ख़ुशबू
को
क़ैद
में
रखना
इत्रदानों
के
बस
की
बात
नहीं
Fahmi Badayuni
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मिरे
गुनाह
की
मुझ
को
सज़ा
नहीं
देता
मिरा
ख़ुदा
कहीं
नाराज़
तो
नहीं
मुझ
से
Shahid Zaki
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मुन्सिफ़
हो
अगर
तुम
तो
कब
इंसाफ़
करोगे
मुजरिम
हैं
अगर
हम
तो
सज़ा
क्यूँँ
नहीं
देते
Ahmad Faraz
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तुम्हारे
दिल
में
कोई
ग़म
नहीं
लेकिन
हमारे
सामने
तो
झूठ
मत
बोलो
Prashant Rao chourase
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बस
अपनी
रूह
को
आराम
देने
के
लिए
हम
ने
न
जाने
कितने
दर
छोड़े
हैं
कितने
जिस्म
छाने
हैं
Prashant Rao chourase
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मैं
कितना
बदनसीब
हूँ
वो
समझा
बस
रक़ीब
हूँ
हुआ
सभी
से
दूर
पर
किसी
के
मैं
क़रीब
हूँ
सुना
दिया
जो
अपना
दर्द
उसे
लगा
सलीब
हूँ
दवा
है
ये
मिरी
ग़ज़ल
मैं
ख़ुद
का
ही
तबीब
हूँ
नहीं
हूँ
जौन
सा
मगर
मैं
भी
बहुत
अजीब
हूँ
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Prashant Rao chourase
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ख़ुदा
ने
ही
किस्मत
बनाई
हमारी
हमारे
ही
हाथों
में
उल्फ़त
नहीं
है
Prashant Rao chourase
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उड़ाता
वो
धुएँ
को
ख़ुद
ही
बादल
हो
गया
''आशिक़
दु'आ
करता
रहा
फिर
सच
में
पागल
हो
गया
''आशिक़
वफ़ा
कर
के
मुहब्बत
में
मिला
ही
क्या
बताऊँ
मैं
उसी
का
ज़िक्र
फिर
से
और
घाइल
हो
गया
'आशिक़
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Prashant Rao chourase
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