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Prashant Sitapuri
tu apni buraai pe yuñ naaz mat kar
tu apni buraai pe yuñ naaz mat kar | तू अपनी बुराई पे यूँँ नाज़ मत कर
- Prashant Sitapuri
तू
अपनी
बुराई
पे
यूँँ
नाज़
मत
कर
बुरा
से
बुरा
वक़्त
काटा
है
मैंने
- Prashant Sitapuri
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आफ़त
तो
है
वो
नाज़
भी
अंदाज़
भी
लेकिन
मरता
हूँ
मैं
जिस
पर
वो
अदा
और
ही
कुछ
है
Ameer Minai
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तुझको
बतलाता
मगर
शर्म
बहुत
आती
है
तेरी
तस्वीर
से
जो
काम
लिया
जाता
है
Tehzeeb Hafi
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मजबूरी
में
रक़ीब
ही
बनना
पड़ा
मुझे
महबूब
रहके
मेरी
जो
इज़्ज़त
नहीं
हुई
Sabahat Urooj
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है
नाज़
मुझको
अपनी
हिंदी
ज़बाँ
पे
यारो
हिंदी
हैं
हम
वतन
हैं
ये
देश
सब
सेे
आला
Dr Mohsin Khan
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कोर्ट
में
तारीख़
के
ये
सिलसिले
चलते
रहे
और
वो
लड़की
वहाँँ
पर
शर्म
से
ही
मर
गई
Sunny Seher
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जिसका
तारा
था
वो
आँखें
सो
गई
हैं
अब
कहाँ
करता
है
मुझ
पर
नाज़
कोई
Aalok Shrivastav
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इक
तो
ये
नूर
उस
पे
मेरी
शर्म
भी
अलग
तू
सामने
रहा
तो
निगह
उठ
न
पाएगी
shaan manral
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नाज़-ओ-नख़रे
क्या
उठाए,
क्या
सुने
उस
के
गिले
देखते
ही
देखते
लड़की
घमंडी
हो
गई
देखते
रहने
में
उस
को
और
क्या
होता,
मगर
जो
थी
जान-ए-आरज़ू,
वो
चाय
ठंडी
हो
गई
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Kazim Rizvi
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लड़
सको
दुनिया
से
जज़्बों
में
वो
शिद्दत
चाहिए
इश्क़
करने
के
लिए
इतनी
तो
हिम्मत
चाहिए
कम
से
कम
मैंने
छुपा
ली
देख
कर
सिगरेट
तुम्हें
और
इस
लड़के
से
तुमको
कितनी
इज़्ज़त
चाहिए
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Nadeem Shaad
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ज़िंदा
रहने
की
ये
तरक़ीब
निकाली
हमने
बात
बिगड़ी
हुई
कुछ
ऐसे
सँभाली
हमने
उस
सेे
समझौता
किया
है
उसी
की
शर्तों
पे
जान
भी
बच
गई
इज़्ज़त
भी
बचा
ली
हमने
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Divyansh Shukla
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तेरे
चेहरे
पे
हारे
जा
रहे
हैं
सब
आँखों
के
इशारे
जा
रहे
हैं
कभी
ये
चैन
से
कटते
थे
यारों
मगर
अब
दिन
गुज़ारे
जा
रहे
हैं
मुहब्बत
से
सभी
हैं
दूर,
यानी
नये
लड़के
सुधारे
जा
रहे
हैं
उतारूंगा
समुंदर
में
भी
कश्ती
अभी
तो
बस
किनारे
जा
रहे
हैं
अदब
रख,
बंदगी
कर,
सर
झुका,
आज
बड़े
बूढ़े
हमारे
जा
रहे
हैं
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Prashant Sitapuri
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सब
मसले
सुलझ
सकते
हैं
शर्त
पे
इक
यारों
गर
बात
कही
जाए
गर
बात
सुनी
जाए
Prashant Sitapuri
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और
भले
दुनिया
में
कुछ
भी
अच्छा
ना
हो
लेकिन
इस
साल
मिरा
उस
सेे
झगड़ा
ना
हो
Prashant Sitapuri
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उसका
कहना
था
साथ
रहना
है
उसकी
बातों
पे
ख़ूब
हँसता
हूँ
Prashant Sitapuri
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हर
आदमी
से
पूछा
गया
मेरे
बारे
में
हर
आदमी
ने
ये
कहा
बंदा
सही
नहीं
Prashant Sitapuri
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