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Prashant Sitapuri
kuchh vo bhi adnaa insaan hai
kuchh vo bhi adnaa insaan hai | कुछ वो भी अदना इंसां है
- Prashant Sitapuri
कुछ
वो
भी
अदना
इंसां
है
कुछ
अपनी
भी
ख़ुद्दारी
है
- Prashant Sitapuri
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अब
जो
पत्थर
है
आदमी
था
कभी
इस
को
कहते
हैं
इंतिज़ार
मियाँ
Afzal Khan
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अलमास
धरे
रह
जाते
हैं
बिकता
है
तो
पत्थर
बिकता
है
अजनास
नहीं
इस
दुनिया
में
इंसाँ
का
मुक़द्दर
बिकता
है
'खालिद
सज्जाद'
सुनार
हूँ
मैं
इस
ग़म
को
ख़ूब
समझता
हूँ
जब
बेटा
छुप
कर
रोता
है
तब
माँ
का
ज़ेवर
बिकता
है
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Khalid Sajjad
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इंसान
अपने
आप
में
मजबूर
है
बहुत
कोई
नहीं
है
बे-वफ़ा
अफ़्सोस
मत
करो
Bashir Badr
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इश्क़
में
कहते
हो
हैरान
हुए
जाते
हैं
ये
नहीं
कहते
कि
इंसान
हुए
जाते
हैं
Josh Malihabadi
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हर
आदमी
में
होते
हैं
दस
बीस
आदमी
जिस
को
भी
देखना
हो
कई
बार
देखना
Nida Fazli
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इश्क़
जब
तक
न
कर
चुके
रुस्वा
आदमी
काम
का
नहीं
होता
Jigar Moradabadi
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देख
कर
इंसान
की
बेचारगी
शाम
से
पहले
परिंदे
सो
गए
Iffat Zarrin
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ख़ुदा
बचाए
तिरी
मस्त
मस्त
आँखों
से
फ़रिश्ता
हो
तो
बहक
जाए
आदमी
क्या
है
Khumar Barabankvi
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तुम्हारी
ज़िंदगी
में
तुम
हमेशा
मुझे
हर
आदमी
में
सुन
सकोगी
सुनोगी
जब
कभी
भी
शे'र
मेरे
तो
ख़ुद
को
शा'इरी
में
सुन
सकोगी
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Sanskar 'Sanam'
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लोगों
ने
बहुत
चाहा
अपना
सा
बना
डालें
पर
हम
ने
कि
अपने
को
इंसान
बहुत
रक्खा
Abdul Hameed
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वबा
का
दौर
है
सहमा
हुआ
है
आदमी
मौला
सभी
हैं
खो
रहे
अपने
रहम
कुछ
तो
ख़ुदा
करिए
Prashant Sitapuri
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मिला
है
जो
भी
उस
सेे
और
अच्छा
मिल
गया
होता
मुझे
उस
वक़्त
गर
तेरा
वसीला
मिल
गया
होता
यही
ग़लती
रही
झगड़े
का
कोई
हल
नहीं
ढूंढा
अगर
हम
ढूंढते
तो
कोई
रस्ता
मिल
गया
होता
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Prashant Sitapuri
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वतन
की
आबरू
ख़ातिर
लड़ेंगे
धड़
जवानों
के
हमारे
देश
की
मिट्टी
कभी
बुज़दिल
नहीं
होगी
Prashant Sitapuri
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है
यही
उलझन
,
यही
है
बेबसी
हम
कहाँ
को
और
जाएँ
किस
गली
दिन
गए
जब
थे
दिवाने
हम
तिरे
अब
नहीं
है
यार
कोई
तिश्नगी
सबको
नीचा
ही
दिखाना
है
उसे
और
कर
ही
क्या
सका
है
आदमी
उसको
भूलो
वो
पुरानी
बात
है
अब
तो
अच्छी
कट
रही
है
ज़िन्दगी
भाग
कर
आना
किसी
मैंदान
से
और
क्या
होगी
सिवाए
बुजदिली
जिस
तरह
देखा
है
मैंने
आपको
दुश्मनी
से
भी
बुरी
है
दोस्ती
'जौन'
पीछे
रह
गए
तो
क्या
हुआ
मैं
करूँगा
बात
सब
सेे
काम
की
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Prashant Sitapuri
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यार
अच्छे
मिल
गए
तो
जानिये
ख़ूब-सूरत
ज़िन्दगी
है
दोस्ती
Prashant Sitapuri
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