किसीगोशेमेंआब-ए-चश्मजाकरकेबहाताहूँ
इसीइकहीअदासदर्दमैंअपनाछुपाताहूँ
नसमझोयेकिमेरीज़िंदगीमेंग़मनहींकोई
अलगयेबातहैदुनियाकेआगेमुस्कुराताहूँ
सुकूँइसबातकावोहाथकोतबथामलेताहै
कभीभीजबमैंराह-ए-ज़िंदगीमेंडगमगाताहूँ
चलेजानातुम्हाराखेलजोक़िस्मतकाकहतेहो
अगरयेखेलहैमैंफिरसेक़िस्मतआज़माताहूँ
मिरेअश'आरकोजोतुमसमझतेहोकिरायेके
सुनोमैंशख़्सवोजोइसग़ज़लकाजन्मदाताहूँ
ज़रुरतज़ीस्तकोजबभीकभीराहतकीहोतीहै
कलाम-ए-मीरकोतन्हाईमेंमैंगुनगुनाताहूँ