kare tu gair se gar baat to main sah nahin paata | करे तू ग़ैर से गर बात तो मैं सह नहीं पाता

  - Kabiir
करेतूग़ैरसेगरबाततोमैंसहनहींपाता
मगरअपनेभीदिलकीबाततुझसेकहनहींपाता
तिरीतस्वीरसेज़ाहिरमोहब्बतरोज़करताहूँ
जानेक्यूँँतिरेहीसामनेमैंकहनहींपाता
अगरतूदूरहोजाएकभीमेरीनज़रसेतो
दिल-ए-नादानमेराएकपलभीरहनहींपाता
तिरेहरझूठकोभीमैंहक़ीक़तमानलेताहूँ
किसीभीबातकेतेरेमैंतह-दर-तहनहींजाता
गुज़रतीसामनेसेजबतोयेहीसोचताहूँमैं
यहीहैवोग़ज़लजोमैंमुकम्मलकहनहींपाता
  - Kabiir
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