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Amanpreet singh
tumhein aati samajh to ye nahin hota
tumhein aati samajh to ye nahin hota | तुम्हें आती समझ तो ये नहीं होता
- Amanpreet singh
तुम्हें
आती
समझ
तो
ये
नहीं
होता
अभी
तो
बस
जवाबों
में
दु'आ
लो
तुम
- Amanpreet singh
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देख
कर
हर
कोई
बेकार
समझ
ले
मुझ
को
अपनी
उल्फ़त
में
गिरफ़्तार
समझ
ले
मुझ
को
बिना
उसके
तिरी
जन्नत
मुझे
मंज़ूर
नहीं
तू
मिरी
मान
गुनहगार
समझ
ले
मुझ
को
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Faiz Ahmad
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रोज़
मिलने
पे
भी
लगता
था
कि
जुग
बीत
गए
इश्क़
में
वक़्त
का
एहसास
नहीं
रहता
है
Ahmad Mushtaq
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कुछ
समझ
में
मिरी
नहीं
आता
दिल
लगाने
से
फ़ाएदा
क्या
है
Anwar Taban
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हमें
हर
वक़्त
ये
एहसास
दामन-गीर
रहता
है
पड़े
हैं
ढेर
सारे
काम
और
मोहलत
ज़रा
सी
है
Khurshid Talab
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जिस्म
के
पार
जाना
पड़ा
था
कभी
इश्क़
कर
के
हुई
बंदगी
की
समझ
Neeraj Neer
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उनकी
सोहबत
में
गए
सँभले
दोबारा
टूटे
हम
किसी
शख़्स
को
दे
दे
के
सहारा
टूटे
ये
अजब
रस्म
है
बिल्कुल
न
समझ
आई
हमें
प्यार
भी
हम
ही
करें
दिल
भी
हमारा
टूटे
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Vikram Gaur Vairagi
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तेरे
एहसास
को
ख़ुशबू
बनाते
जो
बस
चलता
तुझे
उर्दू
बनाते
यक़ीनन
इस
से
तो
बेहतर
ही
होती
वो
इक
दुनिया
जो
मैं
और
तू
बनाते
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Saurabh Sharma 'sadaf'
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मुझको
फिर
से
हसीन
लगने
लगी
उसने
इस
तरह
पेश
की
दुनिया
मुझको
अपनी
समझ
नहीं
आती
और
ऊपर
से
ये
तेरी
दुनिया
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Tajdeed Qaiser
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महसूस
कर
रहा
था
उसे
अपने
आस
पास
अपना
ख़याल
ख़ुद
ही
बदलना
पड़ा
मुझे
Ameer Qazalbash
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वक़्त
अपना
बुरा
चल
रहा
इसलिए
सब
सेे
अच्छी
है
मेरी
घडी
की
समझ
Neeraj Neer
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हमें
यूँँ
मात
दी
उसने
तू
कह
कर
भुला
दी
बात
सब
उसने
तू
कह
कर
Amanpreet singh
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हमारे
साथ
होकर
ग़ैरों
से
मिलने
जो
जाती
थी
मुझे
ये
पूछना
था
सिलसिला
क्या
अब
भी
वैसा
है?
Amanpreet singh
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हमारे
बाद
फिर
उसकी
नज़र
में
कौन
था
वैसे
हमारे
बाद
चश्मों
से
नमी
किसने
निकाली
थी
Amanpreet singh
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अभी
तक
उस
सफ़र
की
याद
आती
है
हर
इक
दीवार-ओ-दर
की
याद
आती
है
मैं
वो
भटका
परिंदा
हूॅं
जिसे
अब
भी
बुज़ुर्गों
के
शजर
की
याद
आती
है
मेरे
हिस्से
से
गर
वो
जा
चुका
है
तो
अभी
क्यूँँ
उस
नज़र
की
याद
आती
है
मैं
जब
दादास
पूछूँ
उनके
ज़ख़्मों
की
उन्हें
लाहौर
घर
की
याद
आती
है
यूँँॅं
बैठा
सोचता
हूॅं
काश
इस
लम्हे
उधर
होता
जिधर
की
याद
आती
है
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Amanpreet singh
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पुरानी
सी
किसी
अख़बार
सा
तो
हो
गया
हूँ
मैं
जिसे
पढ़ने
में
दिल
कोई
लगाता
ही
नहीं
है
अब
Amanpreet singh
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