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Amanpreet singh
zindagi ab ujaad dooñga main
zindagi ab ujaad dooñga main | ज़िंदगी अब उजाड़ दूँगा मैं
- Amanpreet singh
ज़िंदगी
अब
उजाड़
दूँगा
मैं
तेरा
हुलिया
बिगाड़
दूँगा
मैं
एक
ही
शख़्स
है
इधर
मेरा
उसको
भी
छोड़-छाड़
दूँगा
मैं
बालों
को
नोच
कर
के
बैठा
हूॅं
सर
भी
अब
तोड़-ताड़
दूँगा
मैं
जा
वहाँ
से
वो
चाकू
लेकर
आ
आज
काग़ज़
ये
फाड़
दूँगा
मैं
उसको
फिर
से
गले
लगा
कर
मैं
कुर्ते
की
मिट्टी
झाड़
दूँगा
मैं
- Amanpreet singh
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ज़ख़्म
जो
तुम
ने
दिया
वो
इस
लिए
रक्खा
हरा
ज़िंदगी
में
क्या
बचेगा
ज़ख़्म
भर
जाने
के
बाद
Azm Shakri
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हर
एक
काम
है
धोका
हर
एक
काम
है
खेल
कि
ज़िंदगी
में
तमाशा
बहुत
ज़रूरी
है
Khaleel Mamoon
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धूप
में
निकलो
घटाओं
में
नहा
कर
देखो
ज़िंदगी
क्या
है
किताबों
को
हटा
कर
देखो
Nida Fazli
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मुझे
चाह
थी
किसी
और
की,
प
मुझे
मिला
कोई
और
है
मेरी
ज़िन्दगी
का
है
और
सच,
मेरे
ख़्वाब
सा
कोई
और
है
तू
क़रीब
था
मेरे
जिस्म
के,
बड़ा
दूर
था
मेरी
रूह
से
तू
मेरे
लिए
मेरे
हमनशीं
कोई
और
था
कोई
और
है
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Avtar Singh Jasser
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जब
से
हुआ
है
कंधे
से
बस्ते
का
बोझ
कम
बढ़ते
ही
जा
रहे
हैं
मेरी
ज़िंदगी
में
ग़म
Ankit Maurya
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अब
ज़िन्दगी
से
कोई
मिरा
वास्ता
नहीं
पर
ख़ुद-कुशी
भी
कोई
सही
रास्ता
नहीं
Rahul
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ज़िंदगी
क्या
किसी
मुफ़लिस
की
क़बा
है
जिस
में
हर
घड़ी
दर्द
के
पैवंद
लगे
जाते
हैं
Faiz Ahmad Faiz
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ज़िंदगी
मेरी
मुझे
क़ैद
किए
देती
है
इस
को
डर
है
मैं
किसी
और
का
हो
सकता
हूँ
Azm Shakri
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हम
हैं
ना!
ये
जो
मुझ
सेे
कहते
हैं
ख़ुद
किसी
और
के
भरोसे
हैं
ज़िंदगी
के
लिए
बताओ
कुछ
ख़ुद-कुशी
के
तो
सौ
तरीक़े
हैं
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Vikram Gaur Vairagi
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कुछ
बेटियाँ
बिन
बाप
के
भी
काटती
हैं
ज़िंदगी
कुछ
बेटियों
के
सिर
पे
दोनों
हाथ
माँ
के
होते
हैं
Bhoomi Srivastava
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किसी
भी
एक
की
वो
हो
नहीं
सकती
खिलौना
एक
सा
उसको
नहीं
भाता
Amanpreet singh
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वही
फिर
बात
होने
से
ख़फ़ा
हो
तुम
वहीं
फिर
बात
करने
की
मु'आफ़ी
है
Amanpreet singh
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वो
मुझको
देखने
ऐसे
लगा
है
शिकारी
जाल
जैसे
ताकता
है
मैं
तेरी
बे-वफ़ाई
सह
रहा
जो
ये
मेरे
इश्क़
की
अब
इंतिहा
है
सभी
को
पार
जाने
की
पड़ी
है
नदी
में
बैठा
भी
इक
देवता
है
कहानीकार
ने
किरदार
मारा
कहानीकार
भी
तो
बे-वफ़ा
है
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Amanpreet singh
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तेरे
बिन
दिन
गुज़ार
सकता
हूॅं
ज़िंदगी
तुझपे
वार
सकता
हूॅं
जीतने
के
लिए
यहाँ
पर
मैं
तीर
अपनों
के
मार
सकता
हूॅं
ख़ास
तेरे
हैं
इसलिए
चुप
हूॅं
वरना
सर
से
उतार
सकता
हूॅं
पेड़
पर
छुप
के
मुझको
कहते
हैं
कर
तो
मैं
भी
शिकार
सकता
हूॅं
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Amanpreet singh
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बाल
बाँध
कर
वो
दो
लट
निकाल
लेती
है
जान
वान
वो
ऐसे
भी
निकाल
लेती
है
Amanpreet singh
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