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Amanpreet singh
k
k | कभी मेरे लिए बदला नहीं वो
- Amanpreet singh
कभी
मेरे
लिए
बदला
नहीं
वो
हमेशा
से
मगर
ऐसा
नहीं
वो
किसी
के
वास्ते
रोता
भी
था
वो
मगर
मेरे
लिए
रोता
नहीं
वो
अभी
भी
याद
करता
है
किसी
को
मेरा
होकर
भी
क्यूँ
मेरा
नहीं
वो
परिंदों
से
समझ
आया
मुझे
ये
शजर
बस
प्यार
है
प्यारा
नहीं
वो
- Amanpreet singh
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तू
मोहब्बत
से
कोई
चाल
तो
चल
हार
जाने
का
हौसला
है
मुझे
Ahmad Faraz
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ज़रा
मौसम
तो
बदला
है
मगर
पेड़ों
की
शाख़ों
पर
नए
पत्तों
के
आने
में
अभी
कुछ
दिन
लगेंगे
बहुत
से
ज़र्द
चेहरों
पर
ग़ुबार-ए-ग़म
है
कम
बे-शक
पर
उन
को
मुस्कुराने
में
अभी
कुछ
दिन
लगेंगे
Javed Akhtar
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पहले
ख़याल
रख
मिरा
मेहमान
कर
मुझे
फिर
अपनी
कोई
चाल
से
हैरान
कर
मुझे
हैं
कौन
आप,
याद
नहीं,कब
मिले
थे
हम
इतना
भी
ख़ुश
न
होइए
पहचान
कर
मुझे
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Divyansh "Dard" Akbarabadi
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जब
मसअले
न
हल
हो
सकें
बात-चीत
से
फिर
जंग
ही
लड़ो
कि
ज़माना
ख़राब
है
shaan manral
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इस
आ
समाँ
को
मुझ
सेे
है
क्या
दुश्मनी
"अली"?
भेजूं
अगर
दु'आ
भी
तो
सर
पर
लगे
मुझे
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Ali Rumi
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मैं
चाहता
यही
था
सब
चाह
ख़त्म
हो
अब
फिर
चाहकर
तुम्हें
बदला
ये
ख़याल
मेरा
Abhay Aadiv
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नाज़
क्या
इस
पे
जो
बदला
है
ज़माने
ने
तुम्हें
मर्द
हैं
वो
जो
ज़माने
को
बदल
देते
हैं
Akbar Allahabadi
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दुश्मनी
का
सफ़र
इक
क़दम
दो
क़दम
तुम
भी
थक
जाओगे
हम
भी
थक
जाएँगे
Bashir Badr
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शराफ़त
ने
मुझको
कहीं
का
न
छोड़ा
रक़ीब
अपने
ख़त
मुझ
सेे
लिखवा
रहे
हैं
Rajesh Reddy
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रक़ीब
आकर
बताते
हैं
यहाँ
तिल
है
वहाँ
तिल
है
हमें
ये
जानकारी
थी
मियाँ
पहले
बहुत
पहले
Anand Raj Singh
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कब
तलक
वो
याद
आएगी
मुझे
भी
कब
तलक
बस
शा'इरी
से
काम
होगा
Amanpreet singh
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हमारे
शे'र
उसकी
याद
में
गुज़रे
कि
हम
तो
उम्र
भर
इरशाद
में
गुज़रे
ख़ुदा
ये
ज़िंदगी
किस
काम
की
है
फिर
अगर
ये
वाली
भी
फ़रियाद
में
गुज़रे
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Amanpreet singh
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भला
उन
बच्चों
को
अच्छा
लगेगा
क्या
जिन्हें
तब
दुनिया
दिखती
थी
ग़ुबारे
में
Amanpreet singh
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रख
ली
तुम
सेे
भी
दोस्ती
मैंने
और
फिर
कर
ली
शा'इरी
मैंने
उसकी
बातें
करो
सभी
मुझ
सेे
देखनी
फिर
है
बे-ख़ुदी
मैंने
वो
मोहब्बत
से
बाज़
आए
तो
उसको
करना
है
अजनबी
मैंने
उसकी
बातें
बता
दी
है
तुमको
तुम
सेे
भी
कर
ली
दुश्मनी
मैंने
आपसे
बात
कर
के
लगता
है
आपकी
जी
है
ज़िंदगी
मैंने
वो
अँधेरे
से
डरती
रहती
थी
घर
जला
कर
दी
रौशनी
मैंने
जब
तेरे
साथ
दिल
नहीं
लगता
फिर
तो
करनी
है
ख़ुद-कुशी
मैंने
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Amanpreet singh
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मेरा
ये
डर
कहीं
जाता
नहीं
है
क्यूँ
तू
मुझको
छोड़
कर
जाने
लगा
है
क्या?
Amanpreet singh
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